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चीनी सामान का बहिष्कार कौन करेगा ?

कौन करेगा #चीनीसामान का बहिष्कार*
विषय और शब्द दोनों ही गहन चिंतन चाहते हैं लेकिन यहाँ तो भेड़ चाल लगी है।हर भेड़ ख़ुद को झुंड का मुखिया मान के खुश है ।झुंड को हांकने वाला अदृश्य है या कह सकते हैं जान कर छुपा है।आगे आना भी क्यों है जब सब काम पीछे से ही आसानी से हो रहा है।लेकिन इस सारे खेल में एक ही बात है जो सटीक है कि हम (आम जनता) भेड़ हैं,और किसी की अनदेखी लाठी से हांके जा रहें हैं।
महामारी की मार आज पूरा विश्व झेल रहा है।हर देश खुद को मज़बूती से खड़ा करने के भरसक प्रयास भी कर रहा है।किंतु आए दिन एक अलग ही क्रांति हमारे देश में आती जाती रहती है।
“चीनी सामान का बहिष्कार “ ये निरंतर चलने वाली क्रांति कदापि नहीं है।ये एक मौक़ा विशेष क्रांति है जो कैलेंडर के हिसाब से आती जाती है।ख़ास कर त्योहार पर दीवाली पर चीनी पटाखों का और होली पर चीनी रंगों का बहिष्कार हमारी सोशल मीडिया लाइफ़ yका एक अटूट हिस्सा है।जो भी इस रस्म को नहीं निभाता वो देशप्रेम का उल्लंघन करता है।
कोरोना के चलते ये क्रांति ज़रा तेज़ हुई लोग रंग पटाखों के अलावा एक दो चीज़ों के और बहिष्कार पर ज़ोर देने लगे(भेड़ चाल के अनुसार)ये विषय बहुत ही संजीदा है।किंतु इसे दो सवालों में uही पूरा करने की कोशिश करूँगी ।
पहला सवाल ये कि क्या किसी ने कभी गिनती की है कि हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में कितने चीनी उत्पाद हम इस्तेमाल कर रहें हैं?नही न तो आज एक लिस्ट बनाना अपने घर का मुआयना करके।दूसरा सवाल ये कि कोई अन्य देश भारत में एक सूई भी किस की इजाज़त से बेच सकता है?
ये किस विदेश नीति की किस संधि के तहत किस की राज़ी से कब से हुआ?क्या वो आम इंसान जो अपनी ज़रूरत का सामान गली के नुक्कड़ से ही लाता है।किसी मॉल तक जाने की जिसकी हैसियत नहीं वो बहिष्कार कैसे करेगा? उस नुक्कड़ तक वो सामान आया कैसे ।
हमारे रहनुमा हमारी सरकार अपने निजी उत्पादन को ताला मार कर अपने हाथ पैर काटकर विदेशी संधियों को परवान चढ़ा चुके हैं आम आदमी को तो ये भी नहीं पता कि कब उसके बाज़ार पर विदेशी सामान का क़ब्ज़ा हो गया।आज सूई से लेकर भाला तक सब चीनी है।हम अंदाज़ा भी नहीं लगा सकते कि किस हद तक हम चीनी बाज़ार के क़ब्ज़े में हैं।और चार चीजें छोड़ कर उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकते।
ये काम अगर कोई कर सकता है तो वो हमारी सरकार है जो अपने उस हर हस्ताक्षर को ख़ारिज करें जिनके चलते चीन को भारत में घुसने का रास्ता मिला।
चीन वाट्सएप जीमेल और गूगल सर्च नहीं चलाता लेकिन सारी दुनिया को इनके ज़रिये चलाता है।ये तीन की गिनती तक हम अपने जीवन से ख़त्म नहीं कर सकते तो बाकि तो भूल ही जाइए ।
भारत के नौजवान होनहार आज दुनिया भर में डंका बजा रहे हैं किंतु हमारे पास अपना कुछ है ही नहीं।बचा कुचा भी सब बिक रहा है।सिर से पाँव तक देश को विदेशों और निजी कंपनियों को बेच कर हमसे फ़र्ज़ी बहिष्कार के नारे लगवाकर सोशल मीडिया पर भोंडे देशभक्त बनाकर ये लोग सिर्फ़ हमें सदियों से हांक रहें हैं और हम चीनी फ़ोन से टिक टॉक डीलीट करकें फ़ेसबुक पर चौधरी बनकर खुश हैं।
सुबह से शाम दो पैसे बचाने में ही एक आम आदमी की ज़िंदगी गुज़र जाती है।ये देश सरकारी नीतियों से चलता है तो बहिष्कार करना भी उनके ही बस में हैं।ये उनके किये से ही होगा।मैं और आप वही हैं और रहेगें।।।।।
आम इंसान इससे ज़्यादा कुछ नहीं ।जो बाज़ार में है आराम से ख़रीदों ।बाज़ार में क्या हो और कहाँ का हो ये वही जानें जिसके हाथ में है ये।
नमस्कार
सुधा

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