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मेनोपॉज़ या रजोनिवृत्ति के समय कैसे रखें ख़ुद का ख़याल


आज लेख की शुरुआत दोस्तों या मित्रों से नहीं प्रिय सहेलियों से करूँगी।क्योंकि बात मेरी और आपकी है।हर औरत के जीवन में कई पड़ाव आते हैं और हर पड़ाव को हम औरतें बख़ूबी निभाती है।मेनोपॉज़ या मासिक धर्म का बंद होना ये भी एक फ़ेज़ होता है।शारीरिक और मानसिक दोनों ही तौर पर एक बड़ा बदलाव हमारे जीवन में आता है।उम्र के उस मोड़ पर औरत होती है जब खुद का स्वास्थ्य परिवार बच्चे सभी आपको धीरे-धीरे छोड़ रहे होते हैं।बच्चे अपने जीवन में व्यस्त होने लगते हैं।पति की व्यस्तता परिवार को पालने के चरम पर होती है।और आपकी मौजूदगी बस उनकी ज़रूरतों तक सीमित हो जाती है।

और शरीर का चल रहा सालो पुराना चक्र भी बिगड़ जाता है।जिससे एक अवसाद डिप्रेशन आपको घेर लेता है।चिड़चिड़ापन घबराहट ग़ुस्सा आना ये आपकी नई आदत बन जाता है।डॉक्टर के पास जाकर बिना बात के हॉर्मोन्स लेना कदापि कोई इलाज नहीं होता ये और एक बड़ी गलती आप करती हो।जब भी बढ़ती उम्र में पीरियड बिगड़ें तो   बस एक अल्ट्रासाउंड करवा लें कि सब ठीक है या नहीं और ३-४ महीने में इसे रिपीट करें।मेनोपॉज़ एक नैचुरल प्रोसेस है जो अपने तरीक़े से होना ही है।इसमें कोई दवाई कुछ नहीं करेगी।इस दौरान यदि आपको कोई ठीक रख सकता है तो वो है आपकी बैलेंस डाइट बैलेंस माइंड।
सन्तुलित खान पान और मानसिक संतुलन का आप ध्यान रखें तो ये समय आसानी से कट जाएगा ।
इस समय शरीर में बहुत से बदलाव बड़ी तेज़ी से होते हैं और घर के बाक़ी लोगों को इसका अहसास नहीं होता सबसे पहले आपको यह करना है कि पति और बच्चों को अपने भीतर चल रहें बदलावों के बारे में जानकारी दे उनसे बात करें।जितना हो सके खुश रहने की कोशिश करें।

अपनी कोई भी पुरानी रुचि जो गृहस्थी के चलते पूरी नहीं कर पाईं उसे करें।कुछ भी नया सीखने या करने का प्रयास करें ।जब भी हम अपनी पसंद का काम या कोई नई चीज़ सीखतीं हैं तो डिप्रेशन कभी नहीं आता हमारा दिल और दिमाग़ दोनों ही रिचार्ज हो जाते हैं,टाईम बहुत अच्छा पास हो जाता है।और जब आप मानसिक रूप से स्वस्थ होती हो तो शारीरिक कष्ट होने की संभावना भी कम हो जाती है।क्योंकि यही वक़्त होता है जब मानसिक असंतुलन के चलते औरतों में ग्लैंड फेलियर होने की संभावना बढ़ जाती है ।शुगर,ब्लड प्रेशर जैसी बीमारी घेर लेती है।90% औरतों को इसी समय यह बीमारी लगतीं हैं और हम बड़ी आसानी से इसे बढ़ती उम्र का बदलाव समझकर स्वीकार कर लेते है ।मानसिक तनाव ही ग्लैंड फेलियर डिजीज़ का सबसे बड़ा कारण है।यदि आप मानसिक रूप से स्वस्थ हैं तो कभी आपको बीपी शुगर नहीं होगा ।परिवार के ध्यान के साथ खुद का ध्यान रखना बेहद ज़रूरी है ।क्योंकि जो आप पर निर्भर हैं वो क्या आपका ध्यान रखेंगे ।बिना वजह लोगों से उम्मीद करना छोड़ दें।जब आप पूरे परिवार को सँभाल सकती हो तो ख़ुद को क्यों नहीं।
इस वक़्त खाना वो खाना है जिसमें कैल्शियम आयरन भरपूर हो।शरीर से लगातार खून निकलने के कारण हड्डियों से जुड़ी बीमारियों से हम घिर जाते हैं।गोंद कसार इस समय बहुत फ़ायदा करता है जिसमें पिपली,सौंठ,हरड़,दखनी मिर्च,मखाना,मगज मिला हो।मांसाहारी लोग चिकन सूप या पाय का सूप भी ले सकते हैं।मालिश कराना भी एक जरूरी काम है,ख़ास कर पैरों कमर और कलाई की हफ्ते में दो बार मालिश ज़रूर करवायें।
सहेलियों ये समय आएगा और चला जाएगा इससे पहले भी जब शादी हुई थी तुम माँ बनी हर बार ये बड़े बदलाव जीवन में आए और डटकर मुक़ाबला किया था इस वक़्त हार मानकर तुम अपना बचा जीवन एक रोगी की तरह काटने मे झोंक दोगी।एक दो साल की बात है।खुश रहकर और बिना चिंता किये इस समय को काटना है।निरर्थक दवाइयों और डॉक्टरों से बचें।रुटीन चेकअप के अलावा कुछ न करवाए ।ये एक नैचुरल प्रोसेस है इसे नैचुरली पूरा होने दें।अपने तन और मन का ध्यान रखें राम का नाम ले खुश रहें सब अच्छा होगा।
बहुत प्यार के साथ आप सभी के परम स्वास्थ्य की कामना करते हुए ।
सुधा🙏

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