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सुधा की मन तरंग : *फिर किसको चाहते हो*


चाहत इसका कोई दायरा नही है,ये किसी सरहद की मोहताज भी नही चाहने वाले सारी दुनिया को चाहते हैं।घर परिवार दोस्त यार मां बाप,ख़ुद की औलाद।हमारी यही चाहत हमारी ताक़त होती है और कई बार कमजोरी बन जाती है।
 
कई चाहत बहुत कुछ दे जाती है तो कभी सब कुछ छीन भी लेती है।सारी उम्र हमारी किसी न किसी जाहत में गुज़र जाती है।ये चाहत ऐसी चीज़ है जो पूरी होते ही बदल जाती है।जब ये हासिल हो जाए तो अपना रसूख़ और वजूद ही गवा देती है।तमाम उम्र तमाम चीजों तमाम लोगो के पीछे ज़ाया कर देतें हैं हम और उनके गुमान को बढ़ाकर ख़ुद को कमतर कर देते हैं।जो चाहत जो तड़प दुनिया के लिए रखी और हर रिश्ते को कायम रखने के लिए कितनी बार ख़ुद को मिटाया।अब आज को देखो इस तारीख़ ने ये मौका दिया है कि ख़ुद से बढ़कर तो कुछ नही है।तुम हो तो सब है।कोई रिश्ता कोई नाता तुम्हारी जान से बढ़कर नही है।कुदरत ने हम सबका दायरा ही मिटा दिया यूं कहो कि उसे तुम तक समेट दिया आज कोई मर भी जाय तो ख़ूनी रिश्ते तक पहुँच नही पा रहे।ये कैसा इशारा है कुदरत का क्या कहना चाहती है ये हमसे।???

 
कि ख़ुद को भूल के जिस उधेड़ बुन में उलझा रहा अब लौट आ ख़ुद में ये दुनिया फ़ानी है हर कोई बेगाना है तेरा कोई अपना है तो वो ख़ुद तू है।तुझे अगर कोई सच्चा प्यार कर सकता है तो वो भी तू ही है।क्यूँ तड़पता है कि कोई तुझे समझे तूने ख़ुद को कब समझा?किसी की ख़ुदगर्ज़ चाहत को पाने के लिए कितनी बार ख़ुद को ज़लील किया?एक बार ख़ुद को चाहकर देखा होता।सारी उम्र दूसरो को खुश करने में गुज़ार दी हफ़्ते में एक दिन ख़ुद को दिया होता।इस वक़्त कुदरत पल पल पाठ पढ़ा रही है।अपना दिल दिमाग़ खोल कर उसके इशारे समझो।ख़ुद से इश्क करके देखो क्या पता तुम्हें वो मिल जाए जिसकी तुम्हें तलाश थी।ख़ुद से इश्क करना ख़ुदा से इश्क करने जैसा है।क्यूँकि वो तुममें बसती है।ख़ुद को जानना ख़ुदा को जानने के बराबर है और ख़ुद को पाना ख़ुदा को पाने जैसा ।
 
ये करलो फिर ये दायरा ख़ुद बढ़ा देना उसके बाद सारी कायनात पड़ी है इश्क करने के लिए पर शुरुआत ख़ुद से करो।पहले ख़ुद को भर लो फिर छलक जाना।मजा भी इसी में है ख़ुद ख़ाली रहकर किसी को क्या भरोगे।ये तो धोखा है ख़ुद से और औरो से भी।जो अंदर होगा वही तो बाहर आएगा ।
 
जब अंदर नही होगा तो बाहर कैसे आएगा।
 
अब आँखों को बंद करो और सोच कर बताओ....... *फिर किसको चाहते हो* ????

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