Skip to main content

Posts

Showing posts from May, 2020

WILL DONALD TRUMP BECOME THE USA PRESIDENT AGAIN?

विल ट्रम्प डू इट अगेन चुनाव का समय आ रहा है। 3 नवंबर 2020 को दुनिया का सबसे बड़ा चुनाव होने वाला है। प्रतियोगी ट्रम्प और बिडेन हैं। हां, मैं राष्ट्रपति पद के चुनाव की बात कर रहा हूं। संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति। अब, मई शुरू हो गया है और बहुत समय नहीं बचा है, केवल 6 महीने। हम एक दुनिया में बंद दरवाजों के साथ नहीं रह रहे हैं और जीवन के लिए डर हम सभी के साथ है। कोरोना ने विश्व युद्ध 2 से अधिक को मार डाला है। हम एक ऐसे समय में रह रहे हैं जो हम अपने जीवन के बाकी हिस्सों के लिए याद रखने वाले हैं और इस समय में जो होने जा रहा है वह हमेशा के लिए हमारी यादों में हमेशा हमारे साथ रहेगा। ट्रम्प जैसा कि यह देखा गया है कि यह एक प्रकार का बेवकूफ है। एक दिन कुछ कहना और दूसरे पर कुछ कहना। त्रुटिहीन चरित्र वाला कोई भी व्यक्ति ऐसा नहीं कर सकता है। लेकिन वह ऐसी चीजों के लिए जाने जाते हैं। और हो सकता है कि यूएसए के नागरिक अब महसूस कर रहे हों कि उन्होंने चरित्र की ईमानदारी के साथ कुछ के बजाय अपने राष्ट्रपति बनने के लिए एक जोकर को वोट दिया था। मैं सिर्फ यह जानने के लिए उत्सुक हूं कि यह चु

मेनोपॉज़ या रजोनिवृत्ति के समय कैसे रखें ख़ुद का ख़याल

आज लेख की शुरुआत दोस्तों या मित्रों से नहीं प्रिय सहेलियों से करूँगी।क्योंकि बात मेरी और आपकी है।हर औरत के जीवन में कई पड़ाव आते हैं और हर पड़ाव को हम औरतें बख़ूबी निभाती है।मेनोपॉज़ या मासिक धर्म का बंद होना ये भी एक फ़ेज़ होता है।शारीरिक और मानसिक दोनों ही तौर पर एक बड़ा बदलाव हमारे जीवन में आता है।उम्र के उस मोड़ पर औरत होती है जब खुद का स्वास्थ्य परिवार बच्चे सभी आपको धीरे-धीरे छोड़ रहे होते हैं।बच्चे अपने जीवन में व्यस्त होने लगते हैं।पति की व्यस्तता परिवार को पालने के चरम पर होती है।और आपकी मौजूदगी बस उनकी ज़रूरतों तक सीमित हो जाती है। और शरीर का चल रहा सालो पुराना चक्र भी बिगड़ जाता है।जिससे एक अवसाद डिप्रेशन आपको घेर लेता है।चिड़चिड़ापन घबराहट ग़ुस्सा आना ये आपकी नई आदत बन जाता है।डॉक्टर के पास जाकर बिना बात के हॉर्मोन्स लेना कदापि कोई इलाज नहीं होता ये और एक बड़ी गलती आप करती हो।जब भी बढ़ती उम्र में पीरियड बिगड़ें तो    बस एक अल्ट्रासाउंड करवा लें कि सब ठीक है या नहीं और ३-४ महीने में इसे रिपीट करें।मेनोपॉज़ एक नैचुरल प्रोसेस है जो अपने तरीक़े से होना ही है।इसमें कोई

Obsessive Compulsive Disorder Healing By Reiki

#OCD ओब्सेसिव कम्पलेसिव डिसॉडर #HealOCDbyReiki दोस्तो ये #OCD वो रोग है जो आजकल बहुत सुनने में आ रहा है,या ऐसा कह सकते हैं कि लोग जागरुक हो गये हैं कि वहम भी एक रोग होता है।इतने समय में मै जितने भी लोगो को मिली और जितना भी शोध मैंने किया एक अलग ही अनुभव रहा जब ओ सी डी के मरीजो से मिलती हूं या उनके जीवन के बारे में जानती हूं तो कुछ समानता हैं जो सुनने में आई। इनका जीवन कुछ कायदो के साथ रहा बहुत ज्यादा डिसिप्लिन जो मन नही मानना चाहता था फिर भी दीमाग को मानना पड़ा। इनके घरो में किसी एक ही व्यक्ति का शासन था। खुद को एक्सप्रेस न कर सके। धीरे धीरे नियम जो आप नही मानना चाहते थे वो जीवन पर हावी हो गये और जाने अनजाने आपके व्यक्तित्व का हिस्सा। जिन औरतो ने बहुत समर्पण के साथ खुद को मिटा के गृहस्थी संभाली वह एक उम्र के बाद अवसाद का अधिक शिकार हुई उन औरतो की तुलना में जो कुछ लापरवाह रही। दोस्तो ये बीमारी टोटल कंट्रोल की है,आपको आदत पड़ गई है बस मान लेने की।रेकी से मैं इसका ईलाज कर रही हूं और सफलता भी मिल रही है।आप या आपका कोई अपना यदि परेशान है तो रेकी हीलिंग कराएं या खुद रेकी सीख

सुधा की मन तरंग : *फिर किसको चाहते हो*

चाहत इसका कोई दायरा नही है,ये किसी सरहद की मोहताज भी नही चाहने वाले सारी दुनिया को चाहते हैं।घर परिवार दोस्त यार मां बाप,ख़ुद की औलाद।हमारी यही चाहत हमारी ताक़त होती है और कई बार कमजोरी बन जाती है।   कई चाहत बहुत कुछ दे जाती है तो कभी सब कुछ छीन भी लेती है।सारी उम्र हमारी किसी न किसी जाहत में गुज़र जाती है।ये चाहत ऐसी चीज़ है जो पूरी होते ही बदल जाती है।जब ये हासिल हो जाए तो अपना रसूख़ और वजूद ही गवा देती है।तमाम उम्र तमाम चीजों तमाम लोगो के पीछे ज़ाया कर देतें हैं हम और उनके गुमान को बढ़ाकर ख़ुद को कमतर कर देते हैं।जो चाहत जो तड़प दुनिया के लिए रखी और हर रिश्ते को कायम रखने के लिए कितनी बार ख़ुद को मिटाया।अब आज को देखो इस तारीख़ ने ये मौका दिया है कि ख़ुद से बढ़कर तो कुछ नही है।तुम हो तो सब है।कोई रिश्ता कोई नाता तुम्हारी जान से बढ़कर नही है।कुदरत ने हम सबका दायरा ही मिटा दिया यूं कहो कि उसे तुम तक समेट दिया आज कोई मर भी जाय तो ख़ूनी रिश्ते तक पहुँच नही पा रहे।ये कैसा इशारा है कुदरत का क्या कहना चाहती है ये हमसे।???   कि ख़ुद को भूल के जिस उधेड़ बुन में उलझा रहा अब लौट आ ख़ु