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Tuesday, 14 April 2020

Native Got Afflcited By Coronavirus Hindi


एक फलादेश सत्य हुआ किन्तु दुखी करा: जातिका कोरोना वायरस से संक्रमित हुई
यह पिछले अगत सितम्बर (२०१९) के महीने की बात है | एक जातिका ने एक मध्यस्थ के द्वारा अपनी और अपने परिवार की कुंडली भेजी थी | मैं सभी के जवाब दे रहा था | उन्होंने मुझसे अपनी आयु के बारे में पूछ लिया| आम तौर पर यह प्रश्न का उत्तर नहीं दिया जाता है अतः मैंने उनसे कहा की आप कोई और सवाल कर लीजिये |
ऐसे प्रश्नों का उत्तर देने में असुविधा रहती है क्योंकि हम नहीं जानते की प्रश्न कर्ता कितना गंभीर है और अगर उत्तर उसके मन माफिक नहीं होता तो वह बहुत दुखी भी हो  सकता है और डिप्रेशन में भी जा सकता है | लेकिन वे अड़ गई |
तो मैंने दोबारा उनकी कुंडली देखी | उस समय मंगल में चंद्रमा का अंतर चल रहा था और  राहू की महादशा शुरू होने वाली थी | राहू की महादशा अक्टूबर के महीने से शुरू होने वाली थी | 

राहू पर द्रष्टि डालें तो राहू कुंडली में छठे भाव में बैठा हुआ है | यह शुक्र के नक्षत्र में है और शुक्र कुंडली में ३-८ भावों का स्वामी है | शुक्र चतुर्थ भाव में है | शुक्र का नक्षत्र स्वामी स्वयं राहू ही है | राहू का उप – नक्षत्र स्वामी केतु है जो की स्वाभाविक रूप से द्वादश में होगा |
राहू पर गुरु की द्रष्टि है जो की लग्नेश है | किन्तु लग्न का उप नक्षत्र स्वामी स्वयं राहू ही है | अतः लग्न का सीधा सम्बन्ध ६-८-१२ भावों से हैं | यहाँ यह और जानने योग्य बात है की इस जातिका की तबियत वैसे भी ख़राब ही रहती थे और यह एक संतानहीन जातिका है जिसने की बालक गोद लिया है |
पंचम भाव का उप नक्षत्र स्वामी बुध शनि के नक्षत्र में है  और दोनों का संबध ५-११ से नहीं है | अतः जातिका को संतान गोद लेनी पड़ी |
तो मैंने उनसे कहा की आप २०२० में बहुत सावधान रहिएगा क्योंकि कोई गंभीर समस्या हो सकती है | मुझे जो कहना था कम शब्दों में मैंने कह दिया था | ५ अप्रैल को उन मध्यस्थ जी का फ़ोन आया और उन्होंने बताया की उक्त जातिका उनके पति और उनकी काम वाली तीनों को #coronavirus हो गया है और तीनों अस्पताल में हैं |
उनके यहाँ काम करने वाली महिला तो ठीक हो गयी हैं किन्तु इनकी स्थिति कुछ गंभीर है | मैं भूल भी चूका था की मैंने क्या कहा था तो मेरी मित्र ने याद दिलाया की ऐसी बात हुई थी |
फलादेश सही हो तो किसी को भी अच्छा ही लगता है लेकिन जब ऐसे फलादेश सही होते हैं तो उलटे कोफ़्त ही होती है की क्यों बोल दिया था , जो होना है वो तो होना ही है | कृष्णामूर्ति पद्धति का  सिद्धांत ही है की जो होना है वो होकर ही रहेगा | और मुझे लगता है की आयु के बारे में फलादेश नहीं करना चाहिए जब तक की स्थिति बहुत ही खराब न हो गयी हो |
आगर आपने यहाँ तक पढ़ लिया है तो आइये हम उनके स्वस्थ होने की मंगल कामना करें |
आचार्य रमन
7566384193
  

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