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Wednesday, 27 November 2019

Reiki class done at Faridabad Haryana

Taruna Arora and Namita Banga did Reiki class by Dr. Sudha Reiki
Today on 27-11-2019, Reiki class was conducted at Faridabad where Taruna Arora and Namita Banga participated and got their Reiki level 1 & 2 certificates. You can also learn Reiki at your home by just giving us a call, only for women candidates we teach at your home if it is not very far away and also you can learn Reiki at our center near ashram and at Mayur Vihaar New Delhi.
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Monday, 18 November 2019

नीम करोली महाराज जी का बुलावा: काकडी घाट मंदिर पर भंडारा १७.११.२०१९




(यह हिंदी गूगल से अनुवादित है और जहां मुझे गलती लगी वहां मैंने ठीक करने का प्रयास करा है फिर भी गलती रह ही गयी होगी जिसके लिए मैं अभी से क्षमा प्रार्थी हूँ )

(https://www.indiastroreiki.com/2019/11/neeb-karori-maharaj-calling-come-to.html) The original article in English

अपने सभी ब्लॉगों की तरह, मैं यह भी आश्वस्त करना चाहता हूं कि मैं जो भी कहूंगा, वह  सत्य होगा और अगर कोई त्रुटि / असत्य / झूट हो तो मैं महाराज जी से क्षमा मांगता हूं। 

कई साल पहले 2012 या 13 में, मुझे सही से याद नहीं है और कोई ज़रूरत नहीं है, मैं कोलर रोड भोपल के पास काली मंदिर गया, मुझे भूख लग रही थी, उन दिनों मैं "योगी कथामृत" में डूबा हुआ था और देवी जी  से बात कर रहा था । एक परिवार ने आकर माताजी को प्रसाद चढ़ाया। मुझे भूख लगी थी और मैंने माँ से कहा, आपने योगानंद जी को इतना कुछ दिया है कि क्या आप मुझे खाने के लिए सिर्फ कुछ दे सकती  हैं, और अगले ही पल, मैं अपनी आँखों को ठीक से झपका भी नहीं सका, मंदिर की महिला ने मुझे प्रसाद दिया। मैं  खुशी से भर गया और मेरे अंदर आनंद आ गया और मुझे वह घटना याद आ गई जब परमहंस योगानंदजी अपने जीजा के साथ काली जी मंदिर जाते हैं और उनके जीजा जी ने देवी जी का मजाक बनाया कि अगर देवी उनकी इतनी देखभाल करती हैं तो वह हमारे खाने की व्यवस्था भी करेंगी क्या ? और तुरंत ही मंदिर के पुजारी महोदय आते दीखते हैं  और कहते है कि सभी के लिए पर्याप्त भोजन है क्योंकि यह किसी कारण से उस दिन बना था और यह सब  का भोजन आराम से हो सकता है। उस दिन के बाद से उनके जीजा भक्त बन गए  और क्रिया योग के एक उच्च कोटि के साधक बने।
17.11.2019 को काकड़ीघाट उत्ताराखंड में आज मेरे साथ ऐसा ही कुछ हुआ
 यह नवंबर 2019 की 13 तारीख थी, मैं उस दिन किसी कारण से कैंची धाम में था और श्री दीपक नामक व्यक्ति से मिला। वह बहुत व्यस्त दिख रहे  थे और मैं जो कुछ कह रहा था उसका पालन करने के मूड में नहीं थे क्योंकि उसके आसपास के लोग सब्जी पैक कर रहे थे और मैंने उत्सुकता से पूछा कि यह सब क्या है और उसने कहा कि यह काकड़ी घाट पर भंडारे के लिए है। जाहिर तौर पर मैंने पूछा कि यह कब है और मुझे बताया गया कि यह 16 और 17 नवंबर को है और इसका आयोजन कैंची धाम  मंदिर ट्रस्ट और स्थानीय दुकानदारों ने मिलकर किया था।
"भगवान की कृपा से ही आपको भगवान की याद आती है" - रमन महर्षि

मैं  16 और 17 वीं तारीख को वहां जाने की योजना बना रहा था, लेकिन दूरी और समय की कमी के कारण मैंने फैसला किया कि मैं 17 तारीख को वहां रहूंगा। मैं 12  बजे की  में बस में चढ़ गया था और मेरे दिमाग में सिर्फ खाने को लेकर उत्सुकता थी और कोई दूसरा विचार बिल्कुल नहीं था। बस कुछ ही मिनटों के बाद एक ऐसी जगह पर रुकी, जहाँ ये बसें दोपहर के भोजन के लिए रुकती थीं और ड्राइवर ने यहाँ केवल 30 मिनट कहा। मैं भूखा था। मैं नीचे उतर गया, वहाँ एक और बस आगे खड़ी थी और अचानक वह शुरू हो गई। तो मैंने कंडक्टर से पूछा कि यह काकड़ी घाट जायेगी या नहीं और उसने कहा हां और मैं अंदर था।

मैं १२:३० बजे वहाँ पहुँच गया और मैं  मैंने केवल भोजन के बारे में कहा। बहुत से लोग खा रहे थे और मैं भी उनके साथ शामिल हो गया। मैं सोच रहा था कि मैं समय से हूँ , लेकिन मुझे नहीं पता था कि मैं वास्तव में किस समय हूं और बाद में इसका खुलासा होना था।



मैंने भरपेट भोजन करा मोटापे के कारण नीचे बैठ कर पूरा नहीं खाया जाता फिर भी मैं महाराज जी के भंडारे में जन्मो के भूखे जैसे ही खाता हूँ | लोग वहां अपनी थाली स्वयं खाने के बाद फेंकने जा रहे थे | मैं फेंकने के  क्षेत्र में अपनी थाली फेंकने के लिए उठने ही वाला था कि एक वृद्ध व्यक्ति आये और मुझसे पूछा कि मैं मेरा भोजन हुआ की नहीं और मैंने कहा हाँ और उन्होंने  मेरी प्लेट ले ली !!! मैंने उनसे ऐसा न करने के लिए कहा क्योंकि यह अच्छे शिष्टाचार में नहीं है कि लेकिन वे नहीं माने  मैं सुंदरकांड सुन रहा था जो कि कैंची धाम मंदिर की प्रसिद्ध जोड़ी द्वारा गाया जा रहा था।


"दो वृद्ध लोग हैं जिनसे मैं व्यक्तिगत रूप से नहीं मिला हूं, लेकिन वे एक साथ मंदिर में हनुमान चालीसा और अन्य पाठ गाते हैं और वर्षों से ऐसा कर रहे हैं। वे इतने उत्साह और आवृत्ति में हैं कि उन्हें सुनना भी एक आनंद है। वे इसमें इतने डूब जाते हैं कि मेरे जैसे सामान्य व्यक्ति के लिए यह असंभव है। अगर आप कैंची धाम
उत्तराखंड में आते हैं तो उनको अवश्य सुनिए , वे इसे आमतौर पर शाम को करते हैं। "


जब कभी वे गाते हैं तो आपके सामने होने वाली पूरी घटना को महसूस करते हैं, आप इसे बिना किसी बल या दृढ़ता अथवा परिश्रम  के कल्पना कर सकते हैं। वही मेरे साथ हो रहा था, श्री राम चरित मानस सुंदरकांड की कुछ चौपाइयाँ हैं जो मुझे बहुत पसंद हैं और मैं उन्हें पूरे कान और दिल से सुनने का इंतजार कर रहा था। मैं सोमवारी महाराज मंदिर की ओर गया और वहीं बैठ गया। और कुछ समय बाद मैंने उन चौपाइयों को सुना और कुछ भी अधिक आवश्यक नहीं था।



भंडारे में चल रहे सुंदर काण्ड की झलक यहाँ सुनें
 और भी कुछ होने वाला था।

मैं नीचे बने शिवजी के मंदिर में गया और वहीं बैठ गया। एक यज्ञ चल रहा था और पुजारी सभी के सिर पर सिंदूर लगा रहे थे । और पवित्र धागा वहाँ हर एक की दाहिनी कलाई पर बाँधा जा रहा था। मैं मंदिर की सीढ़ियों पर बैठा था। और मेरे मन में यह विचार आया कि महाराज जी जब आप मुझे यहां लेकर आए हैं तो यह भी आप ही करेंगे और जैसा कि मैं सोच रहा था कि एक सज्जन ने टीका की थाली ली और मेरी ओर मुखातिब हुए और अहंकार ने मुझे घेर लिया। अगले ही पल उन्होंने मुँह फेर लिया। (इस एक क्षण में जो हुआ वो सिर्फ मुझे ही समझ आया मेरे मन में अहम् का आना उन सज्जन का मेरी तरफ मुड़ना एक पल देखना और मुह मोड़ लेना - इस किसी शब्द में नहीं समझाया जा सकता सिर्फ महाराज जी की लीला को महसूस करा जा सकता है  जैसे वानर बने हुए नारद जी को सिर्फ वही राजकुमारी और शिव के गण  जो वहां उपस्थित थे  वोही देख पाए )और हँसी मेरे चेहरे और दिमाग में आ गई। 


आज मैं राम चरित मानस का पाठ कर रहा था और नारद का प्रसंग आज समाप्त हो गया जहाँ नारद के अहंकार को मारने के लिए भगवान विष्णु उन्हें वानर का मुख देते हैं। और मैं केवल महाराज जी को धन्यवाद दे रहा था कि वह मुझे हर जगह अपनी उपस्थिति दिखाते रहे  और मैं वहाँ बैठ गया और जब मैं सामान्य स्थिति में आया, तो एक और सज्जन आये जो कि मुझे जानते थे किन्तु वह मुझसे आम तौर पर बात नहीं करते है,और वो पता नहीं कहाँ से आ गए  वह यज्ञ की भस्म की थाली लेकर आये और मेरे माथे पर उसका टीका लगाया। मैं अवाक था!!! कुछ मिनटों के बाद एक और व्यक्ति जो मुझे नहीं जानता था वह सिन्द्दोर चावल की  थाली ले आये और पूछा कि क्या मुझे टीका चाहिए और मैंने कहा हाँ :-)

ये महाराज जी की लीलाएं हैं और कुछ नहीं। जब आपके पास कोई ईगो प्राउडनेस नहीं है और बस सादगी है तो महाराजजी आपकी ही हैं।


"निर्मल मन जान मोहि पावा मोहे कपट छल छिद्र न भावा" महाराज जी ने मुझे बहुत ही सरल तरीके से समझाया। और यह हमेशा उनकी ही जिम्मेदारी है की वे मुझे सदा  बिना "कपट छल छिद्र" के रखें क्योंकि हम कभी नहीं जानते कि बुरी भावनाएं हमें कब खत्म कर देंगी, आप या मैं कोई अपवाद नहीं हैं।


मुझे नहीं पता कि क्या कहना है और क्या लिखना है, आज मेरे दिमाग में बहुत सारी बातें आ रही थीं। अगर मुझे और याद होगा तो मैं इस ब्लॉग में जोड़ूंगा।
 


  
 कैसे पहुँचे काकड़ी घाट उत्तराखंड: काकड़ी घाट, भवाली से लगभग 37 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, जैसा कि उत्तराखंड रोडवेज के सरकारी सड़क परिवहन विभाग के दूरी बोर्ड में बताया गया है। आपको काठगोदाम रेलवे स्टेशन पर उतरने की आवश्यकता है और वहाँ से आपको कई शेयर टैक्सी, फुल टैक्सी, बसें मिलेंगी- यह अल्मोड़ा जाने के लिए राजमार्ग पर स्थित है इसलिए अल्मोड़ा जाने वाली कोई भी बस वहाँ से जाएगी, बस कंडक्टर को ड्रॉप करने के लिए कहेंगे आप काकड़ी घाट जाना  हैं और वह आपको उतार देंगे , साथ ही 12 से 15 बैठने की क्षमता वाली शेयर जीप भी हैं।

शुल्क: टैक्सी में लगभग 1 k से 1.5 k, शेयर टैक्सी में 300 लगेगा, बस में 100 लगेंगे, शेयर  जीप में 130 -140 कुछ लगेगा। आप बस छोड़ कर बाकी सब में मोल भाव भी कर सकते हैं |


अगर आप कैंची या ककड़ी घाट या प्रयागराज या वृन्दावन या महरोली या गुप्त मंदिर जाना चाहते हैं और कुछ मार्ग रुकने आदि को लेकर शंका है मुझे फ़ोन कर सकते हैं  +917566384193

कहाँ रुकें: सबसे अच्छा है की आप कैंची धाम में ही रुक जाइए | वहाँ बहुत सारे होटल हैं लेकिन न्यू महिमा होम स्टे सर्वोत्तम है | मैं भी एक वर्ष से अधिक समय से वहीँ रुकता आ रहा हूँ और आपको भी यही सलाह देता हूँ | वहां के स्वामी का नाम श्री दिनेश तिवारी है और आप इन नम्बर्स पर उनसे संपर्क कर सकते हैं +918006303053and +917579033288. 
इस से आप कैंची और काकडी घाट दोनों ही स्थलों के दर्शन आराम से कर सकते हैं और भोजन की भी उत्तम व्यवस्था है | आपको लगेगा नहीं की घर के बाहर कहीं खाना खा रहे हैं | आप वहाँ रात रुक कर सुबह काकडी घाट जाकर वापस आ सकते हैं और शाम को कैंची धाम मंदिर के दर्शन भी कर सकते हैं | 
काकडी घाट पर रुकने के लिए कुमाऊं मंडल विकास निगम के सरकारी आवास पर इस लिंक के द्वारा कमरा बुक कर सकते हैं |
http://kmvn.in/hotels/details/trh-kakrighat



Sunday, 17 November 2019

Neeb Karori Maharaj Calling :Come to kakdi ghat and have my bhandara



Like all of my blogs, I want to reassert that what ever I will say will be the truth to best of my knowledge and if there are any errors I beg to Maharaj ji to forgive me.  

hindi mein padhne ke liye yahaan click karein  

Many yearsNeeem Karoli Baba Books By Amazon back in 2012 or 13, I do not remember correctly and there is no need to, I went to Kali temple near kolar road bhopal, I was feeling hungry, those days I was immersed in Autobiography of a Yogi and was talking to Goddess Kali ji. A family came and offered prasad to Mataji. I was hungry and I said to Maa, you gave so much toNeeem Karoli Baba Books By Amazon yoganand ji can`t you give me just something to eat, and the next moment, I could not even blink my eyes properly, The lady in the temple Took the thali and offered the prasad to me. I was all tears joy and bliss came out inside of me and I remembered the incident when Paramhans Yoganandji goes to kali ji temple with his brother in law and his brother in law mocks at the Goddess that if your goddess is so caring will she give us something toNeeem Karoli Baba Books By Amazon et and suddenly the priest of the temple comes out and says that there is ample food for the all becasue it was for some reason made that day and all can have it. Since that day his brother in law became a devotee and became a sadhaka of the kriya yoga.

Some thing like that happened with me today at kakdi ghat uttarakhand on 17.11.2019 

It was 13th of November 2019, I was in kainchi dham that day for some reason and met Neeem Karoli Baba Books By Amazona person called Mr Deepak. He was looking very busy and was in no mood to adhere to what I was saying as there were people around him packing vegetables and I just asked curiously what is all this all about and he said this is for the bhandara at Kakdi ghat. Obviously I asked when is it and I was told it is in the 16th and 17th of November and It was organised by Kainchi Dham Temple Trust and the local shop keepers together.
"It is only by the grace of God that You remember God" -- Raman Maharshi
I was only planning to go there on 16th and 17th both but due to distance and time constraints I decided I will be there on 17th. I got into the bus at 12 and I was hungry with only food in my mind had no otherNeeem Karoli Baba Books By Amazon thought absolutely. The bus stopped just after few minutes at a place where these buses stop for lunch and the driver said 30 minutes here only. I was hungry. I got down, there was another bust standing just ahead and suddenly it started. So I asked the conductor whether this will go to Kakdi ghat or not and he said yes and I was in.  
I reached there at 12:30 and I was thinking as I said only of food. Many people were eating and Neeem Karoli Baba Books By AmazonI also joined them. I was thinking that I am just in time but I didin`t knew what time I am in actually and it was to be revealed later. 

I had food till full belly and I saw people were carrying there plates to throw off outside the premises.  I was just about to get up to throw off my plate in the waste area and an old man came and asked me whether I am done or not and I said yes and he took my plate!!! I tried to grab him to not to do it as it is not in good manners that such an old person is doing it but he went away. I was listening to sunderkand which was being sung by the famous duo of the Kainchi Temple.

"There are two old men whom I have not met in person but they together sing Hanuman chalisa and other paath at the temple and have been doing it for years. They are so in rythm and frequency that it is a bliss to listen them doing the paath. They get so immersed in it that it seems impossible for a commoner like me to be in that state ever in my life. if you do come to Kainchi dham uttarakhand do have a listen, they do it usually in the evening"

When ever they sing you feel the entire thing happening in front of you, you can imagine it without any force or persuation. Same was happening with me, there are some chaupayees of Shri Ram Charit Manas Sunderkand which I like a lot and I was waiting to hear them with all ears and heart. I went down towards the somvari maharaj temple and sat there. And after some time I heard those choupayees and nothing more was required. 

More was about to come.

I went to the Shivji temple and sat there. There was a yagya going on and the priest was putting the vermillion on everyone`s fore head. and the sacred thread was being tied on the right wrist of every one there.Neeem Karoli Baba Books By Amazon I was sitting on the stairs of the temple. And this thought came to my mind that maharaj ji when you have brought me here then you only will put the tika on my fore head and tie the thread and just as I was thinking A genntleman took the thali of the tika and turned towards me and Ego surrounded me. The next moment he turned his face away. And laughter came to my face and mind becasue today Only I was reciting Ram charit manas and the narada prasang finished today where to kill the Ego of Narada Lord Vishnu gives him the face of a monkey. And I was only thanking Maharaj Ji to show me his presence every where. And I sat there and when I came to normalcy, another GentleMan came there from no where who is known to me adn does not usually talks to me, he came with the thali of the bhasm of theNeeem Karoli Baba Books By Amazon yagya and applied it on my fore head. I was speechless!!! after a few minutes another person who does not know me took tha thali and came to me and asked whether I want the tika and I said Yes :-)  These are the lilas of Maharaj ji nothing else. When you have no EgoNeeem Karoli Baba Books By Amazon Proudness and just have simplicity Maharaji Ji is all yours. 

              "निर्मल मन जन सो मोहि पावा मोहे कपट छल छिद्र न भावा" Maharaj ji explained this to me in a very simple way. and It is up to him only to keep me without "
कपट छल छिद्र" because we never know when the bad feelings will over power us, you or me are no exception. 

I dont know what to say and what to write, so many things were coming in my mind today. If I will remember more I will add in this blog. 
How To Reach Kakdi Ghat Uttarakhand: Kakdi Ghat is located around 37 kilometers from bhowali as told in the distance board of the Government road transport department of Uttarakhand roadways. You need to get down at Kathgodam Railway Station and from there you will get many share taxi, full taxi , buses- It is situated on the highway to Almora so any bus going to Almora will go from there, just tell the bus conductor to drop you at kakdi ghat and he will do so, also there are sahred jeeps with 12 to 15 sitting capacity.
Charges: The taxi will take around 1 k to 1.5 k , share taxi will take 300, bus will take 100, share jeep will take 130 -140 something.

Where to stay: The best palce to stay is at Kainchi dham itself. Hotel New Mahima is the best for home stay and the owner Shri Dinesh Tiwari ji can be called at +918006303053and +917579033288.

Stay there in the evening and go to kakdi ghat in the morning and come back by afternoon or evening as per your wish.
There is a goverment Tourist stay home at Kakdi Ghat http://kmvn.in/hotels/details/trh-kakrighat you can click this link and book a stay online on the government of uttarakhand kumaun mandal vikas nigam web site.
  

 If you are planning to go to Kakdi Ghat, Hanuman Gadhi , Bhumiyadhar , Vrindavan , PrayagRaj and have some doubt or confusion related to your travel or stay then you can call me at +917566384193



Pictography of today`s bhandara:
 
 सोमवारी महाराज जी की गुफा ऊपर वाली




 सोमवारी महाराज जी की गुफा नीचे अन्दर वाली





 

क्या लता मंगेशकर जी अस्पताल से जीवित बाहर आ पाएंगी ? केपी विश्लेषण



मैंने लता जी के एक प्रशंसक से पूछा कि क्या वह सुरक्षित और स्वस्थ होकर आ रही है या नहीं और उसे एक नंबर देने के लिए कहा। उसने 42 दिए और कहा कि वह जीवित नहीं निकलेगी। नीचे कुंडली है।
आरोही उप स्वामी बुध है। यह 5 वें भाव में स्थित है। 5TH घर बीमारी का इलाज है। बुध राहु के तारे में है और यह प्रतिगामी है। केपी के अनुसार हमें उप स्वामी के तारा स्वामी को छोड़ना होगा यदि यह प्रतिगामी है न कि उप स्वामी।

राहु लग्न में है। यह आज का चंद्रमा है। यह राहु के तारा और शुक्र के उप में है। शनि और बृहस्पति से राहु का संबंध है। इस प्रकार राहु 6, 7, 8, 9, 10, 11, 1, 2, 5 घरों का महत्व है।
न्याय के समय चंद्रमा बृहस्पति के तारा में और शुक्र के उप में होता है। यह पुच्छ चार्ट में दूसरे भाव में है। चंद्रमा मारक भाव में और बृहस्पति तारा में मारक भाव में है। दसा 30-03-2022 तक बृहस्पति शुक्र का है। शुक्र 6 वें घर में और बुध के तारे और राहु के उप में है।
विश्लेषण के अनुसार कुंडली इंगित करती है कि वह अपने शरीर में अस्पताल छोड़ने में सक्षम नहीं हो सकती है।

जन्म कुंडली ,अंक ज्योतिष से फलादेश के लिए  7566384193 पर wattsapp कीजिये . कोई सेवा निशुल्क नहीं हैं |

kya lata mangeshakar jee aspataal se baahar aakar surakshit rahengee? kepee vishleshan

mainne lata jee ke ek prashansak se poochha ki kya vah surakshit aur svasth hokar aa rahee hai ya nahin aur use ek nambar dene ke lie kaha. usane 42 die aur kaha ki vah jeevit nahin nikalegee. neeche kundalee hai.
aarohee up svaamee budh hai. yah 5 ven bhaav mein sthit hai. 5th ghar beemaaree ka ilaaj hai. budh raahu ke taare mein hai aur yah pratigaamee hai. kepee ke anusaar hamen up svaamee ke taara svaamee ko chhodana hoga yadi yah pratigaamee hai na ki up svaamee.
raahu lagn mein hai. yah aaj ka chandrama hai. yah raahu ke taara aur shukr ke up mein hai. shani aur brhaspati se raahu ka sambandh hai. is prakaar raahu 6, 7, 8, 9, 10, 11, 1, 2, 5 gharon ka mahatv hai.
nyaay ke samay chandrama brhaspati ke taara mein aur shukr ke up mein hota hai. yah puchchh chaart mein doosare bhaav mein hai. chandrama maarak bhaav mein aur brhaspati taara mein maarak bhaav mein hai. dasha ka hai
dasa 30-03-2022 tak brhaspati shukr ka hai. shukr 6 ven ghar mein aur budh ke taare aur raahu ke up mein hai.
vishleshan ke anusaar kundalee ingit karatee hai ki vah apane shareer mein aspataal chhodane mein saksham nahin ho sakatee hai.

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