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माँ नर्मदा के उदगम स्थल अमरकंटक की अविस्मर्णीय यात्रा



                                      अमरकंटक में नीम करोली बाबा की खोज

नमामि देवी नर्मदे महाराज जी जय शिव शम्भू जय जय श्रीराम जय वीर हनुमान

हमेशा की तरह मेरे अभिन्न मित्र अरुण शर्मा जी से मैं कुछ बात कर रहा था और कहीं पर जाने की बात चल रही थी | अचानक उन्होंने बोला की वहाँ तक जा ही रहे हैं तो अमरकंटक भी हो आइये क्योंकि उनसे मैंने बहुत पहले कहा था की मैं अमरकंटक जाना चाहता हूँ क्योंकि मेरे आपके हम सभी के प्रिय मित्र गुरु महाराज जी नीम करोली बाबा ने देह त्याग से पूर्व कहा था की वे अब अमरकंटक जाकर रहेंगे और पागल बन कर रहेंगे और लोगों को डूंग(पत्थर) से मारा करेंगे | शर्मा जी ने कहा की कितना अच्छा हो की आपको भी उनके हाथ का पत्थर खाने को मिल जाए और कुछ ही देर बाद मैंने अमरकंटक का आने जाने का प्रबंध रेल द्वारा कर लिया और उनको सूचित कर दिया क्योंकि पत्थर खिलाने वोही चाह रहे थे तो भेजना भी उन्होंने ही था|



अमरकंटक के प्रमुख दर्शनीय स्थल :

  १.   माँ नर्मदा उद्दगम कुंड 
   







  




  २.   श्री प्राचीन मंदिर
  ३.   माई की बगिया
   
 

 

 




  ४.   सोनमुड़ा सोन नदी का उद्दगम

   
 


 

  
  ५.   श्री यंत्र मंदिर
  ६.   कपिल धारा
  ७.   दूध धारा
    
 

 


 

 

 


  ८.   श्री जैन मंदिर
  ९.   श्री चित्रगुप्त मंदिर  

अमरकंटक का पेयजल प्राकृतिक रूप से मीठा है और इसको पीकर जो तृप्ति आपको मिलती है उसकी कोई और उपमा नहीं है |

कैसे आना चाहिए : अमरकंटक आने के लिए रेल से पेंड्रा रोड नाम के स्टेशन पर आपको उतरना होगा और वहां से आप अपनी जेब के अनुसार अमरकंटक आने का प्रबंध कर सकते हैं | जो शेयर टैक्सी है वह ७० से 100 में पहुंचा देती है और कुल समय करीब डेढ़ घंटा लग सकता है | मार्ग बहुत ही सुन्दर है और कहीं पर भी आपको ऐसा नहीं लगता की मध्य प्रदेश में हैं क्योंकि उतनी भीषण गर्मी नहीं लगती और आते आते वह भी कम होने लगती है |पेंड्रा रोड छत्तीसगढ़ में आता है और अमरकंटक मध्यप्रदेश में | अगर स्वयं का वाहन है तो बहुत ही अच्छी बात है| हवाई यात्रा के लिए मेरे अनुसार जबलपुर ही उतरना होता होगा वैसे मुझे ठीक से पता नहीं है और पता करने की इच्छा भी नहीं है |

कहाँ रुकना चाहिए : अमरकंटक में बहुत सारे होटल आदि हैं जहाँ आप रुक सकते हैं किन्तु आपको मुख्य मंदिर तक आना चाहिए और यहीं के किसी होटल में रुकने का प्रबंध करना चाहिए | मंदिर में भी कमरे दो सौ रूपये प्रतिदिन के हिसाब से उपलब्ध हैं और अगर आप परिक्रमा वासी है तो भी आपके लिए यहाँ बहुत सारी रुकने की व्यवस्थाएं हैं , कई आश्रम हैं , लॉज हैं , अतः रुकने का ऐसा कोई ख़ास सरदर्द नहीं है |

कब आना चाहिए : मैं यहाँ मई की भीषण गर्मी में आया हूँ और कह सकता हूँ की साल भार आप कभी भी अमरकंटक आ सकते हैं | सीजन वैसे सर्दियों में ही होता होगा लेकिन गर्मियों में भी कोई ख़ास गर्मी का अनुभव मुझे नहीं हुआ | जिसके पास माया कम होती है उसको वैसे भी गर्मी कम लगती है |

खाना पीना : अमरकंटक में किसी प्रकार का मांसाहार , मदिरा आदि का कोई प्रबंध नहीं है और अगर आप इन सबके इच्छुक हैं तो २५-३० किलोमीटर पहले आपको रुकना चाहिए क्योंकि उसके बाद ऐसी सब व्यवस्था बंद हो जाती है | यहाँ शुद्ध भोजन शाकाहारी भोजन मिलता है और बहुत स्वादिष्ट होता है| आप दाल रोटी खाकर भी आनंदित विभोर हो सकते हैं |

महाराज जी अभी तक तो नहीं मिले हैं पर खोज जारी है और पता है की जब उनकी इच्छा होगी तभी होना है अभी तो सिर्फ हाथ पैर पटकना ही है और कुछ नहीं |

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