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Baba Neeb Karoli Kainchi dham yaatra: बाबा नीब करोली कैंची धाम की अविस्मरणीय यात्रा


जैसा कि हमारा आध्यात्मिक सफर शुरू हो ही चुका था नवम्बर २०१७ से हर महीने प्रभु की इच्छा अनुसार किसी न किसी धाम पहुँच ही जाते हैं | मन में आती है और न जाने कैसे सब इंतज़ाम भी हो जाते हैं | एक आनंद है घुमक्कड़ औघड़ का जिसे बताने के लिए शब्द नहीं जुड़ पाते | ऐसी बातों के लिए शब्द शायद बने ही नहीं हैं | 

नीब करोली बाबा कैंची धाम की यात्रा भी ऐसे ही शुरू हुई | बातों बातों में एक दिन सिद्धार्थ जी ने बताया की उन्हें किसी ने बाबा नीब करोली के बारे में बताया है और तभी से उनके मन में वहाँ जाने की इच्छा हुई है | NEEM KAROLI BABA JI KI KITABEIN ABHI LIJIYE कुछ ही दिन पहले हम तिरुपति से लौटे थे और हमारे पास पैसे भी नहीं थे, पैसे भी नहीं बचे थे और काम को भी बढ़ाना था तो मैंने मना कर दिया किन्तु सिद्धार्थ जी की तीव्र इच्छा और ज़िद के आगे मेरी चली नहीं | कहीं भी आना जाना हो तो बात पैसों पर आ जाती है, जिस दिन से हाँ हुई उस दिन से पैसे भी जुड़ने शुरू हो गए | टिकट भी हो गयी और अंततः कन्फर्म भी हो गयी | 

१२ मई की सुबह काठगोदाम शताब्दी  से हमें जाना था और ११ मई को ही मुझे खबर आयी की की देहरादून में रह रहीं मेरी  बहुत ही प्यारी बुआ जी का निधन हो गया है | मेरा वहाँ जाना बहुत  ज़रूरी था और फिर लगा की ये यात्रा विफल हो गयी | NEEM KAROLI BABA JI KI KITABEIN ABHI LIJIYE मैंने सिद्धार्थजी को फ़ोन लगाया और बहुत दु:खित होकर माफ़ी मांगी की मैं नहीं आ सकूंगी लेकिन अचानक हमें ध्यान आया की देहरादून उत्तराखंड में ही है और मेरे मन में कुछ आया और मैंने सिद्धार्थजी को कहा की मैं वहीँ से काठगोदाम आने का प्रयास करुँगी | 

११ मई की रात को मैं अपने भाई बहिन के साथ देहरादून के लिए निकल गई और सुबह बुआजी के अंतिम दर्शन करके मैंने हल्द्वानी की बस पकड़ ली | सुबह १० बजे मैं बस में बैठी और रात को साढ़े आठ बजे मैं हल्द्वानी पहुंची जहाँ सिद्धार्थजी इंतज़ार करते हुए ही मिले | पूरी एक रात और पूरे एक दिन की यात्रा के बाद आखिरकार में काठगोदाम पहुँच ही गई | 

मन में सुबह बाबाजी के दर्शन का उत्साह था लेकिंन थकान ने एकदम शरीर तोड़ कर रख दिया था | NEEM KAROLI BABA JI KI KITABEIN ABHI LIJIYE शरीर ऊर्जावान नहीं लग रहा था और अपनी उम्र का तकाज़ा अब होने लगा था | मैं बचपन से जुडो , NCC से जुडी रही और देश की अनेकों जगहों को देखा हुआ है | 

खैर, सुबह नहा धोकर नाश्ता करके हम टैक्सी करके कैंची धाम के लिए निकल पड़े | १० बजे हम चले थे और करीब १२ बजे , २ घंटे में हम बाबाजी के धाम  पर थे | 
At Kainchi Dhaam Temple

We at kainchi dhaam temple

Resting at Kainchi dham temple

On the Road Looking for bus to stop


NEEM KAROLI BABA JI KI KITABEIN ABHI LIJIYE कैंची धाम में होने  एहसास आप अपने शब्दों में बयान नहीं कर सकते या यह कह सकते हैं की वहाँ जाके सारे शब्द निशब्द हो जाते हैं | जो देखा जो समझा वो भीतर ही रहे तो अच्छा अन्यथा मनुष्य होने के नाते अहंकार आना स्वाभाविक ही है | करीब २ घंटे हम मंदिर में ही रहे और सिद्धार्थ जी ने वहाँ श्रीराम चरित मानस का थोड़ा सा पाठ करा और दुर्गा सप्तशती का कुछ पाठ करा | 

फिर मैंने सिद्धार्थजी को करुणा रेकी का शक्तिपात दिया और हम वहाँ बैठ कर उस धाम का रसपान करते रहे | ये हमारा पार्ट था  और अभी बाबाजी की लीला होनी बाकी थी | 

भोजन के पश्चात हम वापस जाने के लिए बस टैक्सी वगैरह देखने लगे | हमको आने के लिए आसानी से टैक्सी उपलब्ध हो गई थी तो हम यही सोच  रहे कि जाने के लिए भी कोई परेशानी नहीं होगी |NEEM KAROLI BABA JI KI KITABEIN ABHI LIJIYE लेकिन बाबाजी ने हमारे लिए कुछ और ही सोच कर रखा हुआ था | 
Siddharthji Reciting Ramcharitmanas


जब हम आ रहे थे तो मैंने सिद्धार्थजी को बताया था की यहाँ पास ही नैनीताल में नैना देवी का मंदिर है जो की माँ की शक्तिपीठों में से एक है और सिद्धार्थजी ने कहा की हम उसको भी देखते हुए चलेंगे किन्तु मैंने मना कर दिया की समय नहीं है और वहा शायद चलना भी बहुत पड़े और वो बात आये गयी हो गयी थी | 

NEEM KAROLI BABA JI KI KITABEIN ABHI LIJIYE हर दो मिनिट में बस आ रही थी और कोई रोक नहीं रहा था , एक बस रुकी किन्तु उसमें बैठने की जगह नहीं थी और हम लोग थक चुके थे |  उसके बाद किसी ने बस भी नहीं रोकी और समय भी निकला जा रहा था और रात्रि में हमारी ट्रैन भी थी | वापसी का कोई साधन नज़र नहीं आ रहा था और हम दोनों ही बेचैन हो चुके थे और हर गाडी को हाथ देने लगे थे | 

NEEM KAROLI BABA JI KI KITABEIN ABHI LIJIYE जब व्याकुलता बहुत बढ़ गयी तब अचानक ही एक वैगन -आर हमारे सामने आकर रुकी जिसमें २ लोग बैठे हुए थे | उन्होंने पूछा की कहाँ जाना है ? तो हमने कहा कि काठगोदाम तो उन्होंने कहा कि वे हमें भुवाली छोड़ देंगे और वहाँ से हमको काठगोदाम की बस मिल जायेगी | हमने उनका धन्यवाद किया और उनकी गाडी में बैठ गए | अगले २ मिनिट में हमारा परिचय हुआ और कैंची धाम का पूरा इतिहास उन्होंने बताया | जैसा हमने उनको बताया की हम लोग यहां पहली बार आये हैं| फिर उन्होंने बताया की वे  लोग भी आज घूमने निकले थे और उनको रानीखेत जाना था लेकिन रस्ते में उनका मन बदल गया और नैनीताल जाने का मन हो गया और उन्होंने गाडी मोड़ ली और उन्हें हम दिखे और फिर वो यात्रा शुरू हुई जो बाबा नीब करोली ने हमें करानी थी |

श्री संतोष सिंह जी जिनको बाबा जी ने हमें घुमाने के नियत करा था | वे एक पायलट , वकील , NEEM KAROLI BABA JI KI KITABEIN ABHI LIJIYE अध्यात्म से जुड़े हुए एवं बहुत ही अच्छे व्यक्ति है जिन्होंने हमें बहुत ही पारिवारिक रूप से घुमाया और रेकी के बारे में सीखने की इच्छा भी व्यक्त करी | ज्योतिष के बारे में भी उनको बहुत ज्ञान है |  हमको कभी भी ऐसा नहीं लगा की हम किसी अपरिचित व्यक्ति के साथ घूम रहे हैं | 



वे एक वकील हैं और उनका हीरे और नग आदि बनाने की फैक्ट्री चीन में है  | वे अपने जीजाजी के साथ घूम रहे थे |  वे उत्तराखंड से ही थे और सारा उत्तराखंड उन्होंने पैरों से नापा हुआ था | थोड़ी दूर चलने पर उन्होंने हमसे कहा की क्या आपके पास कुछ समय है,  पास ही नैनीताल है जहाँ के २ मंदिर वे लोग देखने जा रहे थे | NEEM KAROLI BABA JI KI KITABEIN ABHI LIJIYE मैंने उनसे पूछा की कौन सा मंदिर तो जवाब आया नैना देवी का मंदिर !!!! हम स्तब्ध रह गए क्योंकि सुबह ही आते समय सिद्धार्थजी ने नैना देवी जाने की इच्छा व्यक्त करी थी |  हम कैसे ना करते जब बाबा जी ने स्वयं ही जाने  इंतज़ाम कर दिया था | तो हमने झट से हाँ कर दी | नैना देवी मंदिर के अद्भुत दर्शन करने से पहले उन्होंने हमें बताया की पास ही घोड़ाखल मंदिर है जो की भारतीय सेना में बहुत प्रसिद्द है | लगभग सत्तर प्रतिशत सैनिक जीवन में अवश्य ही यहां आते हैं और मत्था टेकते हैं | NEEM KAROLI BABA JI KI KITABEIN ABHI LIJIYE यहाँ सेना का काफी असला आदि है जिसमें की वायु और थल सेना दोनों ही है | 

इस मंदिर की प्रथा है की यहां मन्नत पूरी होने पर घंटी बाँधी जाती है और आप देख सकते हैं की यहाँ घण्टियों का अम्बार लगा हुआ है 

Ghodakhal Temple





मैं सुनकर भावविभोर हो उठी क्योंकि मेरे बेटे ने भी इस साल राष्ट्रीय रक्षा अकादमी की परीक्षा दी है और मैं चाहती हूँ की वो अपने देश की सेवा करे | मन में बहुत सारे भाव लेकर मैं उस भव्य ऊर्जावान मंदिर में NEEM KAROLI BABA JI KI KITABEIN ABHI LIJIYE गयी और वहाँ की ऊर्जा से  ओतप्रोत हो गयी | वहाँ ग्वेल देवता मंदिर , घोड़ाखल भैरव मंदिर, काली मंदिर और रामचरित मानस पाठ करते हुई हनुमानजी के दर्शन किये  और फिर उस ऊर्जा उस भाव को मन में समेटे हुए वे लोग हमें  नैना देवी जी के मंदिर ले गए जहां हमने देवी माँ के दर्शन करे | 


ग्वेल देवता मंदिर घोडाखल 

ग्वेल देवता मंदिर घोडाखल 

 



नैनीताल  में जहां नैना देवी जी  मंदिर है उसी क्षेत्र में मस्जिद , गुरुद्वारा और चर्च भी है | बीचो बीच नैनी लेक और चारो ओर चारो धर्म नजारा देखने लायक था| कुछ ही देर मे हम उस जगह से ऐसे परीचित हो गये मानो हमेशा से यहां आते हो| 

फिर हम लोग वहाँ से चलने लगे और फिर से उन सज्जन ने हमसे अनुरोध करा की अगर अब भी समय हो तो शीतला माता का मंदिर निकट ही है और आपको उनके भी दर्शन करने चाहिए | हम मना करने की स्थिति में नहीं थे क्योंकि जो चमत्कार हम दोपहर से देख और महसूस रहे थे उसके बाद ना बोलने की जगह कहीं से भी नहीं बचती है | हमने कहा की चलिए NEEM KAROLI BABA JI KI KITABEIN ABHI LIJIYE तो पता चला की वे लोग हमें हनुमानगढ़ लेकर आये हैं जहां पे बाबा नीब करोली ने स्वयं ही स्थापना करी हुई थी | बाबा वैसे ही हमे घुमा रहे थे जैसे कभी वो यहां खुद कभी घूमे होंगे | 

इस अद्भुत जगह श्रीराम जी के सबसे प्रिय भ्राता भरत जी का मंदिर का स्थापित है और मैंने तथा सिद्धार्थजी ने जीवन में पहली बार भारत जी के मंदिर के दर्शन प्राप्त करे | 


हमको शीतला माता के मंदिर के दर्शन भी करने थे किन्तु बाबा की इच्छा सिर्फ भरत जी  के और हनुमानजी के मंदिर के दर्शन कराने की थी और इसलिए हम गलत मार्ग पर चले गए और शीतला माता के दर्शन नहीं कर पाए | 

अब शाम ढलने लगी थी और हमारा वापस आना अब बहुत आवश्यक हो चुका था | उन लोगों ने  ने हमें काठगोदाम स्टेशन के पास उतार दिया और वे अपने रस्ते चले गए | 




और हम इस अविस्मरणीय यात्रा को, जो कि अब शरीर मात्र द्वारा  करी गयी ना रहकर आत्मा की यात्रा अधिक हो चुकी थी , अपने ह्रदय में समेटे हुए स्टेशन की तरफ चल दिए| हमारा टिकट भी कन्फर्म नहींNEEM KAROLI BABA JI KI KITABEIN ABHI LIJIYE था किन्तु समय आते ही वह भी कन्फर्म हो गया जिसका श्रेय सिद्धार्थजी के बहुत पुराने मित्र अरुण शर्मा जी को है जो कि इस यात्रा के प्रेरणा स्तोत्र भी थे | 

मेरे जीवन को प्रभु अपनी दया और कृपा से इतना भर देंगे मैंने कभी सोचा नहीं था | हमारा ये जीवन ऐसे ही सफर में बीत जाये अब तो मंजिल की चाह भी बाकि नही रही|
हमारे और भी अनेक अनुभवों को पढ़िए | नीचे दिए लिंक पर क्लिक कीजिये :

http://www.indiastroreiki.com/2018/08/maharaj-ji-neem-karoli-baba-fulfills.html

http://www.indiastroreiki.com/2018/08/neem-karoli-baba-by-his-grace-visited.html

                 जय श्रीराम श्रीराम जय राम जय जय राम जय जय श्रीराम जय जय श्रीराम 
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