Learn KP Astrology Click Here

Thursday, 4 January 2018

क्रिया और प्रक्रिया : सुधा की मन तरंग

क्रिया और प्रक्रिया में सामान्य भेद :

१. क्रिया : वह कृत्य है जो आपके मेरे या किसी के भी द्वारा किया जा रहा है और उस पर अधिकार है |

२. प्रक्रिया : कोई भी कृत्य जो की प्राकृतिक रूप से हो रहा है उस पर प्रकृति और इश्वर का हस्तक्षेप है और मानव उसे नियंत्रित नहीं कर सकता वह प्रक्रिया है |


क्रिया करने के लिए मानव स्वतंत्र है और वह जब चाहे जैसे चाहे किसी भी क्रिया को क्र सकता है | लेकिन हम आमतौर पर यह भूल जाते हैं की हर क्रिया की एक प्रतिक्रिया होती है जो हमें अपनी द्वारा करी गयी क्रिया का परिणाम देकर ही रहती है जिसे हम प्रारब्ध , भाग्य , इश इच्छा आदि अनेकों नाम से जानते हैं | इस से मनुष्य नहीं  बच सकता है |

क्रिया का जन्म हमारी इन्द्रियों से होता है, इन्द्रियों से वशीभूत होकर मानव वह सब कुछ करता है जिसका परिणाम वह आमतौर जानता ही नहीं है |

इन्द्रियों की गति हमारी संस्कृति सभ्यता और विवेक पर निर्भर करती है | जो किसी देश काल खंड में सही है वही आगे गलत हो सकता है किन्तु मूलभूत रूप से जो सही या गलत चला आ रहा है वह अपरिवर्तनीय है |
वहीँ भौतिक शरीर के सभी तंत्र प्रक्रिया में आते हैं जैसे श्वसन , पाचन, विसर्जन आदि | इस पर मानव का कोई हस्तक्षेप नहीं है और यह सतत चलने वाली गति है |

मानव देह का मूलभूत उद्देश्य इश प्राप्ति है इसके अतिरिक्त और कुछ नहीं | और यह क्रिया से नहीं प्रक्रिया का हिस्सा बन कर ही संभव हो सकेगा | किन्तु आप कोई क्रिया करें ही नहीं ऐसा भी नहीं है | "कर्म हीन नर कछु पावत नाहीं "

मेरा इशारा उस भेद की ओर है जहां इच्छा समर्पण में बदल जाती है | परमात्मा ने इस जीवन को एक प्रक्रिया का हिस्सा बनाया था किन्तु मानव ने सब ध्वस्त कर दिया | बात करते हैं शिशु जन्म की जो की स्वयं में एक प्रक्रिया है किन्तु आज उसका स्वरुप कुछ और ही हो गया है |

प्रकृति ने सब कुछ इंगित करा हुआ है | शिशु को जन्म के बाद ४० दिन एकांत में रखा जाता है | इस समय वह न ठीक से देख सकता है न ही उसको आसपास के शोर का अर्थ समझ आता है और अगले छः माह उसका पाचन तंत्र विकसित होता है जो की गर्भ में पूर्ण विकसित नहीं होता है | दांत आना इसका सन्देश देता है की अब उसका पाचन तंत्र विकसित हो चुका है |
अगर उसके बाद मानव दूध न पिए तो किसी प्रकार की कोई हानि नहीं होती है क्योंकि पोषक तत्व उसको अन्य स्तोत्रों से मिल जाते हैं |
मानव अपनी जन्मदात्री माता के दूध का क़र्ज़ तो याद रखता है किन्तु जिन गायों आदि का दूध उसने ग्रहण करा है उसे भूल जाता है | बाद में उसको पता भी नहीं चलता की उसके जीवन के उतार चढ़ाव क्यों आ रहे हैं और क्या कारण है | अपने इस कर्म के प्रति शायद ही कोई व्यक्ति कभी जागरूक होता है |
बाल्यावस्था की किताबों का बोझ यौनावस्था में भी बना हुआ है और २५-३० साल तक बना रहता है | और इसका नतीजा यह हुआ की जो प्रक्रिया से परे हुआ वह निष्क्रिय हो गया या फिर दुष्क्रियता का शिकार हो गया |
हमाए आसपास हो रहे अपराध और एनी विसंगतियों का कारण ही यही है की हम प्रकृति की प्रक्रिया को भुला चुके हैं |

जब हम इश्वर की पक्रिया को समझने लगते हैं तो हम स्वयं ही बेकार के कर्मों से  मुक्त होने लगते हैं | मानव शरीर एक प्राकृतिक संस्थान है और हमको भौतिकवाद से दूर रखना चाहिए | एक स्वस्थ मन तथा देह के लिए हमको ही स्वयं की प्रकृति को समझ कर उसको इश्वर के अनुरूप ढालना होगा |
जब हम इसको समझे बिना देह को अन्य जगहों पर उलझाने लगते हैं तभी यह मन और शरीर बीमार होने लगते हैं |
वर्षों तक ये आपका प्रतिरोध करते हैं और एक समय बाद हार कर बीमार होने लगते हैं | हमारा शरीर हर तरह की बिमारियों से लड़ने के लिए सक्षम है किन्तु हमारी ही जीवन शैली ने इसको नकारा बना दिया है |
प्रकृति प्रदत्त सुविधाओं की जगह मानव निर्मित वस्तुओं पर हम अधिक आश्रित हो चुके हैं | मानव ने दो चीज़ें बनाइ हैं - चीनी और नमक | दोनों ही देह के लिए ज़हर से कम नहीं हैं | अगर देह को इनकी आवश्यकता होती तो निश्चित ही प्रकृति इनके पौधे भी उगा कर देती |

हम जो भुगत रहे हैं वह और कुछ नहीं बल्कि शरीर और मन के प्रति करी गयी हमारी क्रिया के ही कारण है और कुछ नहीं है | ३५ वर्ष के बाद देह बोलती है की अब बस करो लेकिन मानव नहीं सुनता और परिणाम स्वरुप उसको भुगतान देना होता है कभी इस जगह कभी उस जगह |

रेकी और वैदिक ज्योतिष के द्वारा आप इन सब झाझातों के प्रति स्वयं को जागरूक कर  सकते हैं और अन्य  लोगों के जीवन को भी सुधार सकते हैं | रेकी वैदिक ज्योतिष और प्राकृतिक चिकित्सा विज्ञान ही आज के युग में वो रामबाण हैं जो आपके जीवन जो तार सकते हैं | ज़रुरत है तो बस अपने अंतर की आवाज़ को सुनने की |

अगर आपको लगता है की आपको जीवन की सही राह पर चलना अब शुरू करना ही चहिये तो रेकी और ज्योतिष की सहायता से अपने aura को स्कैन करवाइए |

रेकी सीख कर दूसरों को भी लाभ दीजिये | कर के देखिये और लाभ का वर्णनं आप स्वयं करेंगे |

समस्त शुल्क आदि की जानकारी के सिर्फ दिन के समय संपर्क कीजिये : 9650008266











No comments:

Post a comment