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Thursday, 25 January 2018

IPL 2018 ASTROLOGY PREDICTION OF T-20 MATCHES

    IPL 2018 ASTROLOGY PREDICTION

IPL 2018 is going to begin from 7th April and will continue till 27th May.  I have been giving IPL astrology predictions since 2012 and the accuracy has been quite fair. Basically astrology is not meant for these stupid things but since people demand it a lot so we have to give it.



I have given predictions on www.astrosage.com, www.astrocamp.com, www.astrovidhi.com, www.simpleastro.com etc and this year prediction will be given on this site and also on astrovidhi. 

I humbly request you all to not make any financial decisions on the basis of these predictions and regret later if it fails. I as an astrologer feel sorrier for a failed prediction. It is like an operation failing for a surgeon in which the patient succumbs. Here you people may succumb to the deep greed which you might have.

I insist that you believe in the law of karma, do good things, and be positive. IPL 2018 Astrology prediction will be given on this site for sure but if you make any kind of financial decision then I am not responsible for it. 

IPL is a very interesting series and I have been watching it since its inception. So many moments of chill, thrill are all mixed in it. In between some teams did match fixing also and they were brought to book by the concerned authorities. 

Players have disgraced not only this game but themselves, when they are already getting so much of money, I do not understand why they need more of it, and most of the players will play in the next IPL also. Those who are complete idiots may do such bad things. 

I am very much sure that players like MSD M.S.Dhoni, Virat kohli, are very truthful to their games and will never run after the greed web. I hope IPL 2018 will come with a better format, as it is told in the news that it is going to begin 1 hour before and will end at 10:00 pm daily and on Saturdays the matches will be played back to back on different channels. 

The afternoon match has been rescheduled at 5:30 pm instead of 16:00 hrs which used to be earlier starting time.

Reiterating, Astrology is not meant for giving match predictions, that too of these commercial nature matches.  I will feel better if you consult for real-life problems and I will be happy to help after having my service charges. I also practice Reiki and do distance healing. 

I have learned Reiki from a Grandmaster of the subject Dr. Sudha. She is an eminent Reiki healer and has loads of power in her meditation which I have felt myself when I did my course from her. She is a class apart, not like commercial Reiki sellers in the market. If she is working on a patient then it is sure that out of 100, 97 will get healed. This is my personal experience and she has given me healing many times when I used to go out of my breath. There are many like me who have been cured partially/permanently depending upon their problems. In fact she can tell the possible winner just by her meditation but since all that will destroy her meditation; she stays away from this trap. 

IPL 2018 astrology will be given on this site and let`s hope for a thundering IPL this season with new players getting chance to showcase their talents and making progress in their career as a cricketer.
YOU CAN WATTSAPP FOR THE SAME ON 7566384193

Sunday, 21 January 2018

रेकी द्वारा लक्ष्य की प्राप्ति

                    रेकी से साधें अपना लक्ष्य 


जैसा कि मैं हमेशा कहती हूँ कि रेकी जीवन जीने का सबसे आसान रास्ता आपको दिखाती है | जीवन में हर इंसान का एक लक्ष्य लिए जी रहा है | कोई कुछ पाना चाहता है कुछ बनना है किसी को आसमान की बुलंदियां  छूनी होती हैं | सभी कुछ न कुछ चाह ही रहे हैं | 

अध्यात्म की सुनें तो चाहत करना ही दुःख है | लेकिन सारी दुनिया अध्यात्म के पीछे ही नहीं है, भौतिकवादी लोगों का प्रतिशत इस जगत में अधिक है | बिना चाहत और लक्ष्य के जीवन ही निरर्थक है | रेकी से किस तरह हम अपने लक्ष्य की प्राप्ति कर सकते हैं | इस ब्रह्माण्ड में सभी चीज़ें विद्यमान हैं | 

वो सब कुछ जो एक दिमाग सोच सकता है क्योंकि हमारा दिमाग वही सोच सकता है जो इस जगत में विद्यमान है | आजतक जो भी घट चुका है या फिर घटने वाला है वह सब कुछ पहले से ही विद्यमान है | ब्रह्माण्ड के लिए भूत , भविष्य , वर्तमान में कोई फर्क नहीं है सभी कुछ बस है वहाँ पर | 

आपको आपके जीवन में अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए जिस भी चीज़ की ज़रुरत है जैसे विद्या, माया , मार्ग , धन , कुछ भी |
रेकी के द्वारा हम एक  सामान्य सन्देश simple message पॉजिटिव अफार्मेशन positive affirmation के साथ ब्रहमांड में देते हैं  और रेकी ऊर्जा उसे कार्यान्वित कर के देती है | 

रेकी की रोज़ की प्रैक्टिस से आप बहुत ही आसानी से अपने जीवन के लक्ष्य की प्राप्ति कर सकते हैं | आपको सिर्फ आपकी प्रार्थना की शक्ति को बढ़ाना है और परमात्मा की उपस्थिति पर विश्वास रखना है | 

रेकी कोई जादू नहीं है पर जब हम किसी चीज़ पर विश्वास करते हैं तब हमारा विश्वास ही हमें जादू दिखाता है | दुनिया में कुछ भी नामुमकिन नहीं है ये रेकी सीख कर रेकी की साधना कर उसको प्रयोग में लाने के बाद आपको स्वयं समझ में आ जाएगा | 

जब आप अल्फ़ा लेवल में रहते हैं तभी आप अपने लक्ष्यों को बोलना शुरू कीजिये किन्तु किसी का भी बुरा नहीं बोलना है | आपका लक्ष्य आपका भला होना चहिये न की किसी का बुरा | आप देखेंगे की धीरे धीरे आपका लक्ष्य आपके पास आता जा रहा है | 
कोई भी व्यक्ति इसको कर सकता है, जैसे की खाना बनाना है वैसे ही रेकी की मदद से आप अपना लक्ष्य भी पा सकते हैं और खाने में कितनी मिर्ची , नमक, आदि का प्रयोग करना है वैसे ही आप अपने  जीवन में भी स्वाद और रंग भर सकते हैं | अपना भविष्य आप स्वयं निर्धारित कर सकते हैं | 



सपनों का महत्त्व और वास्तविकता

       सपने क्यों आते हैं और क्या दर्शाते हैं 

नींद में बंद आँखों से देखी जाने वाली कोई घटना , व्यक्ति अथवा वाक्या, कुछ हो चुका या होने वाला, कुछ जाना कुछ अंजाना सपने हैं | हम जब नींद के आगोश में रहते हैं तो एक अलग ही दुनिया में पहुँच जाते हैं | उठने के बाद कुछ याद रह जाता है और कुछ हम भूल जाते हैं | कुछ लोग सपनों को जोड़ तोड़ कर अपने निकट भविष्य का निर्धारण भी कर लेते हैं और कुछ इसे शकुन अपशकुन से भी जोड़ लेते हैं | 


क्या असल में इन सपनों का हमारे जीवन में कोई महत्त्व होता है ? क्या ये मात्र परिकल्पना मात्र हैं ? 

हमारे दिमाग का चलना  कुछ तरंगों पर निर्भर करता है | BETA, ALPHA, THETA AND DELTA वो तरंगें हैं जो हमारी चेतना और अवचेतना का निर्धारण करती हैं | जब हम पूरे होश में रहते हैं तो वो बीटा स्तर है और जब हम ध्यान में, सोने से ठीक पहले , सोकर उठने के ठीक बाद जिस स्तर हम रहते हैं वह अल्फ़ा स्तर है | थीटा में चेनता सिर्फ नाम मात्र की होती है लेकिन इसमें भी कुछ लोग बहुत अच्छी हीलिंग कर लेते हैं और ध्यान के बहुत अच्छे स्तर तक पहुँच जाते हैं | 

आखिरी स्तर है डेल्टा जिसे डीप स्लीप भी कहा जाता है | इसमें मनुष्य का चेनता में रहना असंभव होता है | 

जैसे हमारे दिमाग और नींद के चार स्तर होते हैं उसी प्रकार हमारे सपनों के भी प्रकार होते हैं जो दिमाग की इन्हीं तरंगों और स्तरों पर निर्भर करता है|

बीटा : यह चेतन अवस्था है , जब हम सोने लगते हैं और नींद कच्ची ही होती है, हमें इसी अवस्था में सपने भी दिखाई दे जाते हैं, बीटा में हम चीज़ें देखते हैं जिसे हम इस जीवन में जी रहे हैं और जो प्रतिदिन हमारे साथ घट रहा होता है जैसे हम सुखद परिवार या पडोसी या काम काज से जुड़े हुए लोग या कोई घटना मतलब रोज़मर्रा का जीवन बीटा में देखते हैं | 

अल्फ़ा: जब मस्तिष्क की आवृत्ति थोड़ी कम होती है तब हम अल्फ़ा स्तर में जाते हैं | इस अवस्था में आये हुए सपनें हमारी अन्दर दबी हुई चाहतें होती हैं | जो हम बनना चाहते हैं , करना चाहते हैं , कुछ पाना चाहते हैं , या फिर हम खुद को असलियत में जहां देखना चाहते हैं वही सब हम अल्फ़ा स्तर में देखते हैं | कई बार हम अपने पसंदीदा अभिनेता या नेत्री के साथ प्यार कर रहे होते हैं आदि इसी प्रकार के सभी स्वप्न अल्फ़ा स्तर में आते हैं | 

थीटा : जब हम इस स्तर में होते हैं तब हम अपने अवचेतन मस्तिष्क के ठीक मध्य में होते हैं और चेतन मस्तिष्क पूर्ण रूप से  कार्य बंद कर  चुका होता है |  यहाँ भूत भविष्य वर्तमान का भेद समाप्त हो चुका  होता है | हमारे इर्द गिर्द घूम रही लाइफ साइकिल में से कुछ भी या कोई भी द्रश्य हम देख पाते हैं, यदि वो वर्तमान का है तो हम उसे पहचान पाते हैं यदि वह भूत या भविष्य में से कहीं का होता है तो हमारे लिए वह द्रश्य अंजाना सा होता है लेकिन वो होता हमारे ही जीवन का हिस्सा है | कभी हम खुद को अनजान लोगों के बीच पाते हैं और कभी किसी पहाड़ या किसी पानी के आस पास देखते हैं | 

कभी हम आग देखते हैं कभी हम सांप देखते हैं या किसी की शादी या मृत्यु लेकिन उसका वर्तमान से कोई लेना देना नहीं होता | 

कभी कभी लोग एक ही सपने को बार बार देखते हैं या मरे हुए अपने लोग आकर कोई सन्देश देकर जाते हैं और यह सब थीटा स्तर में ही संभव होता है| 

हमारे अवचेतन में समस्त ब्रह्माण्ड बसा हुआ है | ऐसा कुछ नहीं है जो की नहीं है, या तो वो घट चुका होता है या घटने वाला होता है | थीटा में हम कुछ भी देख सकते हैं लेकिन उसको किसी से जोड़ना ठीक नहीं है  क्योंकि वो हमारे ही जीवन का एक अंश है | 

डेल्टा : यह चिर निद्रा की अवस्था है और यहाँ भी हम अपने अवचेतन की सैर ही करते हैं सब देखते हैं लेकिन हमें बाद में याद कुछ नहीं रहता है | डेल्टा वह अवस्था है जहां हम चेतनाहीन हो जाते हैं और हम वही याद रख पाते हैं जो हमारी चेतना में होता है |


Dr. Sudha: +919650008266

Sunday, 14 January 2018

सरल मृत्यु का मार्ग आसान कर देती है रेकी हीलिंग

Reiki Eases Death Process

बहुत समय पहले किसी पारिवारिक आयोजन में जाना हुआ था | वहाँ किसी वृद्ध को देख कर ध्यान आया की ये दूर के रिश्तेदार हैं | वो व्हीलचेयर पर थे और उनका पुत्र उनको लेके आ रहा था | उनकी आयु उतनी नहीं थी फिर भी उनका स्वास्थ्य बहुत खराब था | 

मैंने उनके बेटे से पुछा की क्या हो गया है तो उसने बताया की पिछले ढाई साल से इनका येही हाल है | एक एक्सीडेंट में उनके सर पे चोट लगी थी जिस से उनका pituitary gland  खराब हो गया और उनका शरीर धीरे धीरे निष्क्रिय होने लगा | सभी डॉक्टर मना कर चुके हैं | सब कुछ करने के बाद भी  कुछ फायदा नहीं है | 

मैंने उसको बोला की इस कष्ट से रेकी हीलिंग से मुक्ति मिल सकती है | जीवन को इस तरह घसीटने से बेहतर है की शांत होकर देह त्याग कर दिया जाए जिस से इस नारकीय जीवन से मुक्ति मिले | अगर तुमको ठीक लगता है तुम्हारी सहमती है तो मैं इनकी सरल मुक्ति के लिए हीलिंग करुँगी |  उसने भी मेरे सकारात्मक भाव से अपनी अनुमति दे दी | 

रेकी में ऐसा करने से पहले परिवार के सदस्यों की मुक्ति आवश्यक है और इसलिए मैंने उसकी अनुमति ली | मैंने उन रिश्तेदार की हीलिंग शुरू करी और पाया की उनके कार्मिक अवरोध | KARMIC BLOCKAGES| बहुत अधिक थे और मुझे पूरे २१ दिन लगे और उसके बाद ही वो मुक्त हो सके | 

आखिरी बार जब उनको रुग्णालय ले जाया गया तो वहाँ २ दिन भारती रहने के बाद वे मुक्त हो गए और मुझे भी इसकी खबर मिल गयी | 

कई लोगों के लिए मैंने यह हीलिंग करी है सिर्फ उसी शर्त पर जब और कोई रास्ता न हो और परिवार वालों की पूर्ण सहमती हो अन्यथा मैं ये हीलिंग नहीं करती हूँ | मेरा भाव यह रहता है की जब ठीक होने का कोई मार्ग नहीं बचा है तो फिर आगे जाने का मार्ग ही आसान हो जाये | 

व्यक्ति जब मृत्यु शैय्या पर होता है तो अपने कर्मो को ही भोग रहा होता है | जब तक कोई कर्म अटका हुआ रहता है जब तक व्यक्ति की मृत्यु संभव नहीं है और रेकी ही सबसे आसान तरीका है इन कर्मों के जंजाल से मुक्त होने का | 
मुक्त होते ही यह आत्मा अपने अगले शरीर की तरफ चली जाती है और मानव देह कष्ट से मुक्त हो जाती है | 
मैंने कई बार यह करा है और एक ग्लानी भी हो जाती है किन्तु यह सोच कर की शायद यह मुक्ति मेरे द्वारा ही लिखी गयी है | 



Dr. SUDHA: 9650008266


नवजात शिशु की रेकी हीलिंग प्राकृतिक ऊर्जा के द्वारा

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Reiki Symbol for Curing New Born Babies

रेकी ग्रांडमास्टर REIKI GRANDMASTER बनने के बाद, जो कि रेकी सीखने का अंतिम पड़ाव होता है, मैंने रेकी हीलिंग में नित नए प्रयोग करे और ये सब डिवाइन गाइडेंस divine guidance के चलते ही हो रहा था | परमात्मा की करनी सिर्फ वही जनता है | मेरा सोचना, मेरा करना सब किसी और के ही हाथों हो रहा था | बीमारी से पहले ही उसके इलाज का तरीका तैयार हो रहा था, मुसीबत आने के पहले ही उसका समाधान मेरे पास आ जाता था |

इश्वर के इस मनोरंजक खेल को में साक्षी भाव से देखकर रोमांचित होती थी और जीवन में एक अद्भुत आनद समाविष्ट हो चुका था | कर्ता , कर्म और करण का भेद अब समझ आ रहा था | मुझे पता था और है की मैं सिर्फ एक जरिया मात्र हूँ और करने वाला मुझे सिर्फ किसी के भले के लिए प्रयोग में ले रहा है | इसे भी मैं उस परम पिता का आशीर्वाद ही मान कर अपना काम करती रही हूँ |

बात उस समय की है जब मैं अपने डे केयर में आखिरी तीन बच्चों के साथ बैठी हुई थी और मेड जा चुकी थी | अचानक ही बहुत तेज़ बारिश शुरू हो गयी और बिजली कौंधने लगी | मैंने उन बच्चों को अपने पास बिठा लिया जिससे की उनको डर न लगे | मुझे बिजली के कड़कने से यह आभास होने लगा की वो मुझसे कुछ कहना चाह रही है | इस प्रकार से जब भी रेकी मुझे इशारा करती है तो मेरा आज्ञा चक्र मुझे उसका आभास कराने लगता है |

उस समय भी मुझे वही आभास होने लगा और मैंने देखा कि बच्चे अपना खेलने में मस्त थे, मैं अपने डे केयर के दरवाज़े पर गयी और समझने का प्रयास करने लगी | उस समय अंतर्ध्यान होना संभव था किन्तु जो समय जिस कार्य के लिए होता है उसे कोई बदल नहीं सकता | 

वो क्या होता है कैसे होता है उसे समझा पाना, शब्दों में बाँध देना संभव नहीं होता है | 

उस समय मेरे पास कुछ बच्चे ऐसे भी आते थे जो की मानसिक रूप से स्वस्थ नहीं थे , पूछने पर पता चला था की जन्म के समय वो रोये नहीं थे | मेरा मन उनके लिये व्यथित होता था और मैं सोचती थी की रेकी से इनकी कैसे मदद कर सकती हूँ |Best Certified Reiki Products From Amazon Buy Now और ये वही समय था जब ब्रह्माण्ड ने मेरे इस प्रश्न का उत्तर मुझे दिया | 

बिजली की उस ऊर्जा को मैंने अपने हाथों में प्राप्त करा और एक सिम्बल का रूप दिया जिसको मैं उन बच्चों पर प्रयोग करने वाली थी जिनको ऐसी समस्या थी | उनकी कमी को रेकी पूरा करेगी ऐसा मुझे पूर्ण विश्वास था | 

मुझे पता नहीं चला की समय कितना लगा उसको सिम्बल का रूप देने में , मात्र एक क्षण या कुछ मिनिट पर मेरी रचना पूर्ण हो चुकी थी |  सिम्बल का नाम, रंग  और काम संकल्प के साथ  पूरा हो चुका था Best Certified Reiki Products From Amazon Buy Now
हमेशा की तरह मैंने रेकी और इश्वर को धन्यवाद दिया | रात्री में ध्यान के समय बाकी का बचा हुआ कार्य मैंने पूर्ण कर लिया |

दो महीने बाद मेरी भाभी की डिलेवरी थी | मैं और मेरा भाई उसे लेकर अस्पताल पहुंचे और सारी रात इंतज़ार करते रहे लेकिन डिलेवरी नहीं हुई | अगले दिन मेरी दूसरी बहनें आ गयीं और हम आराम करने के लिए जाने लगे Best Certified Reiki Products From Amazon Buy Now|  थोड़ी देर में हमारी बहिन का फोन आया कि डिलेवरी हो गयी है लेकिन डॉक्टर ने बताया नहीं है की बीटा हुआ है की बेटी |

अस्पताल जाकर पता चला की बच्चा अभी रोया नहीं है और अभी ऑब्जरवेशन में है | यह सुनकर मैं वहाँ से हट कर एकांत में आ गयी और अपने आंसुओं से अपने इश्वर और गुरु को धन्यवाद दिया की कैसे उन्होंने समस्या आने से पहले ही मेरे हाथों में यह शक्ति दे दी थी |

मैंने रेकी का आह्वाहन करा और अपने नवजात भतीजे के साथ कनेक्शन बनाया |Best Certified Reiki Products From Amazon Buy Now उस दिन मैंने जो सिम्बल बनाया था उसका प्रयोग करा और हीलिंग देना शुरू करी |

आधे घंटे बाद नर्स ने बताया कि बच्चा ठीक है और बेटा हुआ है | सभी परीक्षण करके डॉक्टर ने बच्चा हमारे हाथ में दे दिया |

इस तरह उस सिम्बल का सबसे पहला प्रयोग मेरे ही घर में हुआ|Best Certified Reiki Products From Amazon Buy Now मैं इश्वर की ये लीला चुपचाप देखती रही और ह्रदय से धन्यवाद देती रही यह जानते हुए भी की मैं उनका धन्यवाद करने के लायक भी नहीं हूँ | 

इसके बाद हरिद्वार में माँ गंगा की शीतल ऊर्जा से जले हुए लोगों की हीलिंग के लिए सिम्बल बनाया और लोगों का उफ्चार करा Best Certified Reiki Products From Amazon Buy Now|

चंद्रमा की शीतल ऊर्जा से अवसाद से घिरे लोगों और मानसिक तनाव को कम करने के लिए भी सिम्बल बनाया और इनके अनुभव मैं अपने अगले लेख में करुँगी | 


Dr. Sudha: 9650008266



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hon sha ze sho nen होन शा ज़े शो नेन से नसों का इलाज

hon sha ze sho nen  होन शा ज़े शो नेन

लगभग पांच छह साल पहले एक दिन पता चला की तरुण जो कि मेरा रिश्तेदार है , उसका एक्सीडेंट हो गया | वो जिस बस से उतर रहा था उसी का टायर उसके पैर के पंजों पर चढ़ गया था | दो दिन बाद मैं अस्पताल गई तो मुझे पता चला की उसके अंगूठे और २ उंगलिया पूरी तरह खराब हो चुकी हैं  जिस से वहां का ब्लड सर्कुलेशन रुक चुका  था और पैर धीरे धीरे काला पड़ने लगा था Best Certified Reiki Products From Amazon Buy Now

डॉक्टर का कहना था की कोशिश चल रही है और दो दिन में पता चलेगा की पैर का क्या काना है , हो सकता है की पैर काटना पड़े Best Certified Reiki Products From Amazon Buy Now

तरुण मात्र २४ वर्ष का था और वो रेकी के बारे में कुछ जानता भी नहीं था | मैंने उसको थोडा सा समझाया और कहा की अगर तुम इश्वर पर विश्वास करते हो तो जो रेकी मैं करने वाली हूँ उसको पॉजिटिव तरीके से ग्रहण करे | हो सकता है की हमारी कोशिश कामयाब हो जाए Best Certified Reiki Products From Amazon Buy Now

दो दिन बहुत कम समय होता है और रेकी में अधिक समय लगता है फिर भी मैंने हिम्मत नहीं हारी | और कोई दूसरा रास्ता भी नहीं था| 

उसी रात मैंने उसकी साइकिक सर्जरी करी और मेरा काम था ख़राब नसों को हटाकर नई नसों को लगाना | ये आपको अजीब लग सकता है पर रेकी ऐसे ही काम अक्रती हैBest Certified Reiki Products From Amazon Buy Now

मैंने हीलिंग के दौरान नसें हटाई और नई नसें लगाईं और जब नसों को जोड़ने का समय आया तो मैं सोच में पड़  गई  की इनको कहाँ कैसे जोड़ना है |  मैं डॉक्टर नहीं हूँ जिसको मानव शरीर की बारीकियों का पता हो | 

एक बार मन विचलित हुआ किन्तु रेकी की डिवाइन गाइडेंस के चलते उसी क्षण मुझे याद आया की hon sha ze sho nen  होन शा ज़े शो नेन, जो की रेकी में कनेक्टिंग सिम्बल है जो दूरस्थ इलाज में हमारा संपर्क स्थापित करते हैं  और अगर येही उनका काम है तो क्यों अ ये काम उन्हीं पर छोड़ दिया जाएBest Certified Reiki Products From Amazon Buy Now

मैंने तुरंत "होन शा" को वहां स्थापित करा और ये अफार्मैशन डाली  की इनको इनके सही स्थान पर जोड़ दीजिये | 
सर्जरी पूरी होने के बाद मैंने रेकी के इस नए मार्गदर्शन के लिए उसका धन्यवाद करा और साइकिक सर्जरी में "होन शा" के एक नये  इस्तेमाल का आविष्कार किया Best Certified Reiki Products From Amazon Buy Now

तब से आजतक जब भी बॉडी ऑर्गन या ग्लैंड ट्रांसप्लांट करना होता है तो hon sha ze sho nen  होन शा ज़े शो नेन का मैं प्रयोग करती ही हूँBest Certified Reiki Products From Amazon Buy Now

मेरे द्वारा सिखाये हुए सभी छात्र जिनको रेकी में चैनल कहा जाता है इसी विधि का प्रयोग भी करते हैं और अच्छा परिणाम भी पाते हैं | 

जब आप किसी नेक कार्य की शुरुआत करते हैं तो उसका परिणाम स्वयं इश्वर अपने हाथ में ले लेते हैंBest Certified Reiki Products From Amazon Buy Now

दो दिन बाद जब तरुण का चेकअप हुआ तो उसकी नसें काम अकरने लगीं थीं और नसों में रक्त का प्रवाह सही होने लगा था| कुछ ही दिनों में वो अस्पताल से घर आया और आज तक उसका पैर एकदम ठीक है Best Certified Reiki Products From Amazon Buy Now

रेकी से पहला कैंसर का उपचार : सुधा रेकी

रेकी का तीसरे स्तर का शक्तिपात (Reiki level three attunement ) प्राप्त हुआ ही था की मुझे पता चला की मेरी सहेली ने एक दिन बताया की उसके पड़ोस में रहने वाले रहने वाली एक छह साल की बच्ची को कैंसर डिटेक्ट हुआ है Best Certified Reiki Products From Amazon Buy Now

उसके ऊपरी मसूड़ों में कैंसर था जो की धीरे धीरे ऊपर की तरफ बढ़ रहा था | डॉक्टरों ने बोल दिया था की ऑपरेशन करना पड़ेगा लेकिंग बच्ची का चेहरा बिगड़ जाएगा और अगर उसको बढ़ने दिया तो जीवन अधिक शेष नहीं है | 

मैंने अपने रेकी मास्टर से इसके बारे में बात करी लेकिन उन्होंने बहुत निराशाजनक उत्तर देकर बात को टाल दिया, लेकिन उन्होंने ही एक बार कहा था की एक रेकी हीलर को हर संभव प्रयास करना चहिये और मैंने करा भी यही Best Certified Reiki Products From Amazon Buy Now

रेकी से ऊर्जान्वित करके मैंने अपनी सहेली के द्वारा उस बच्ची को पानी और क्रिस्टल माला भिजवाई और उसकी हीलिंग शुरू कर दी | जब जब बच्ची सोती तो उसकी माँ मुझे फोन करती और मैं उस बच्ची की हीलिंग करती | 

डॉक्टरों ने कुछ मोहलत दी थी की अगर उस  बच्ची का कैंसर अगली जांच में और आगे की तरफ बढ़ता हुआ मिलता है तो फिर उस बच्ची का ऑपरेशन नहीं करेंगे | बात राजीव गाँधी कैंसर अस्पताल नई दिल्ली की है | 

मेरे पास उतना ही वक़्त था जिसमें की मैं उस बढ़ते हुए कैंसर को रोक लूं | मेरी ये शुरुआत ही थी लेकिन मुझे रेकी पर पूरा भरोसा था | साइकिक सर्जरी  के दौरान मुझे कुछ समझ नहीं आया लेकिन मैंने उस कैंसर को रेकी से बाँध दिया जिससे की कैंसर आगे न बढे | यहाँ उस बच्ची के माता पिता का भरोसा भी मेरे साथ था और जब मैं हीलिंग देती थी तो वे भी प्रार्थना करते थे Best Certified Reiki Products From Amazon Buy Now

अगले चेकअप में पता चला की कैंसर आगे नहीं बढ़ा है और डॉक्टर ऑपरेशन के लिए तैयार हो गए | ऑपरेशन के दौरान उस  बच्ची ने मांग राखी की वो क्रिस्टल की माला उसके सिरहाने रख दी जाय | 

ऑपरेशन हुआ और चेहरे पर कोई घाव नहीं हुआ , साथ ही साथ रेकी का सबसे बड़ा चमत्कार सामने आया की जब उस ट्यूमर को डॉक्टरों ने निकाला और बच्ची के माँ बाप को दिखाया तो वह एक रेशे से लिपटा हुआ था जैसे किसी धागे में उसको बाँध दिया गया होBest Certified Reiki Products From Amazon Buy Now

इस चमत्कार की खबर उस लड़की की माँ ने मुझे फोन पर बताई थी और मैं इस रेकी के चमत्कार के आगे निशब्द हो चुकी थी |  उन लोगों से मैं कभी नहीं मिली बस मेरी सहेली के माध्यम से ही सारी बातें हुई थींBest Certified Reiki Products From Amazon Buy Now
रेकी का यह मेरा पहला दूरस्थ उपचार,(Distance Healing by Reiki Energy) था और रेकी और इश्वर की महिमा को साक्षी भाव से देख पाने की शुरुआत भी | 

रेकी कोई जादू नहीं है , आप भी मुझसे रेकी प्राप्त कर सकते हैं और इसी तरह लोगों की सेवा कर सकते हैं और इसे अपने जीवन यापन का पूर्णकालिक साधन भी बना सकते हैं | रेकी से मार्ग सरल हो जाते हैं और आवश्यकता होती है सिर्फ आपके विश्वास की Best Certified Reiki Products From Amazon Buy Now|

 DR. SUDHA 9650008266

मैंने सत चुगा है : सुधा की मन तरंग

कभी आपने देखा है किसी पक्षी को दाना चुगते हुए ? पेड़ पर लगा हुआ फल हो , मिटटी में सना हुआ दाना हो , मवेशी की पीठ पर बैठे हुए कीड़े मकोड़े , पानी में बहती हुई मछली , या सड़क पर मृत जानवर -- वो उस तत्व को चुग ही लेता है जिससे उसको जीवन मिला या मिलता है | उसका लक्ष्य हर परिस्थिति में जीवन प्राप्त करना होता है और उसे रूप रंग गुण से कोई सरोकार नहीं होता है | अपनी प्रकृति के अनुसार वह अपना जीवन जीता है |

मानव जीवन में सुख शांति , सद्भाव , परस्पर अपने विपरीत भावों में मिले जुले पड़े हुए हैं | हमारा काम है उनमें से अच्छाई चुग कर निकालना | पिता की कठोरता में हमें स्नेह मिलता है, माँ की गाली में प्यार , गुरु के दंड में शिक्षा है | हमारा ध्येय ही हमें सत की प्राप्ति कराता है |

संसार हर भाव से परिपूर्ण है चाहे वह अच्छाई बुराई हो , सत्य असत्य हो, अँधेरा उजाला है | हम इसमें से क्या चाहते हैं और क्या वास्तव में उसको पा लेने की क्षमता हमारे अन्दर है ?  जैसे कोई शिक्षक बहुत कठोर हो , लेकिन उसका ज्ञान को समझाने का तरीका बहुत साधारण हो तो उसके कठोर व्यवहार को त्याग कर उसके साधारण सिखाने को ग्रहण कर लेना चहिये | वो तरीका ही दाना है जो ज्ञान देता है |

कोई पडोसी बहुत ही दुर्व्यवहार भले ही करता हो लेकिन भोजन सभी में बाँट कर खाता हो तो वो बांटना ही उसके दिया हुआ दाना है , हमको उसे ग्रहण करना चहिये |

कोई बहुत नशा करता है, अवारागर्दी करता है , लड़ता है लेकिन जब किसी को मदद चाहिए तो सबसे पहले वही आकर खड़ा होता है तो उसका तो उसका वो मदद का भाव ही हमारा दाना होना चहिये |
पत्नी दिन भर बडबड करती हो लेकिन घर का पूरा ध्यान रखती हो तो उसका बडबडाना मिटटी है और ख्याल रखना दाना |

पति बहुत मेहनती है, सारी ज़िम्मेदारी निभाता है लेकिन प्रेम का प्रदर्शन नहीं करता तो उसका निभाना ही दाना है और इसकी सख्ती मिटटी है |

प्रेयसी के साथ भीड़ भरी बस में चढ़ना उस प्रेयसी को आपके पास भी तो कर देता है , येही दाना है और भीड़ मिटटी है |

जीवन में यदि सबने आपसे अपना काम निकाल कर आपको हटा दिया तो भी आपको यह याद रखना चाहिए की आप कितनों के काम आये |

अपने सत का पोषण करना और दूसरों के सत को धारण करना ही जीवन है | सुख का दाना चुगना ही जीवन है | सुख हर कण में विद्यमान है, इश्वर ने स्वयं को हर जगह स्थापति करके रखा हुआ है |

एक समय के बाद अपना दाना चुगना स्वयं को सीखना ही होता है जैसे माता पिता का सानिध्य बहुत सुख देता है किन्तु एक समय बाद वह नहीं रहता | आगे स्वयं को ही जीना होता है |

बचपन बहुत अच्छा होता है जैसे प्रेयसी की एक झलक पाने के लिए सुबह जल्दी उठ कर नहा कर उसकी एक झलक देखने का सुख | इतनी मशक्कत के बात एक झलक पाने का सुख चुग लेना यह बाद में नहीं मिलता है|

बहुत बार बड़े होकर यह सोच लेते हैं की कोई और चुग कर थाली में रख देगा | ऐसा कभी होता है, सबका सुख अलग है , सबकी परिभाषा अलग है|

अपने सुख का निर्धारण खुद कीजिये और उसको चुगना शुरू कीजिये | यह कठिन लग सकता है मगर होता नहीं है | परिस्थिति चाहे जो भी हो लेकिन मुझे उसमें से सुख चुगना है , मुझे आनंद निकालकर लाना है | वही मेरी भूख है | वही जीवन का अमृत है |

मेरे जीवन का एकमात्र रस जिससे मुझे जीवन की शक्ति मिलती है , ऊर्जा मिलती है , यह मेरी वही ऊर्जा है जिससे मैं लोगों को सुख बाँट सकता हूँ क्योंकि अब मैं उस से परिपूर्ण हूँ |

मैं भर चुका हूँ और अब दे रहा हूँ , सुख शांति , प्रेम , आनंद सब यहीं था मैंने चुग लिए और अब खुद को भरने के बाद दूसरों में बाँट रहा हूँ या रही हूँ |





Thursday, 4 January 2018

क्रिया और प्रक्रिया : सुधा की मन तरंग

क्रिया और प्रक्रिया में सामान्य भेद :

१. क्रिया : वह कृत्य है जो आपके मेरे या किसी के भी द्वारा किया जा रहा है और उस पर अधिकार है |

२. प्रक्रिया : कोई भी कृत्य जो की प्राकृतिक रूप से हो रहा है उस पर प्रकृति और इश्वर का हस्तक्षेप है और मानव उसे नियंत्रित नहीं कर सकता वह प्रक्रिया है |


क्रिया करने के लिए मानव स्वतंत्र है और वह जब चाहे जैसे चाहे किसी भी क्रिया को क्र सकता है | लेकिन हम आमतौर पर यह भूल जाते हैं की हर क्रिया की एक प्रतिक्रिया होती है जो हमें अपनी द्वारा करी गयी क्रिया का परिणाम देकर ही रहती है जिसे हम प्रारब्ध , भाग्य , इश इच्छा आदि अनेकों नाम से जानते हैं | इस से मनुष्य नहीं  बच सकता है |

क्रिया का जन्म हमारी इन्द्रियों से होता है, इन्द्रियों से वशीभूत होकर मानव वह सब कुछ करता है जिसका परिणाम वह आमतौर जानता ही नहीं है |

इन्द्रियों की गति हमारी संस्कृति सभ्यता और विवेक पर निर्भर करती है | जो किसी देश काल खंड में सही है वही आगे गलत हो सकता है किन्तु मूलभूत रूप से जो सही या गलत चला आ रहा है वह अपरिवर्तनीय है |
वहीँ भौतिक शरीर के सभी तंत्र प्रक्रिया में आते हैं जैसे श्वसन , पाचन, विसर्जन आदि | इस पर मानव का कोई हस्तक्षेप नहीं है और यह सतत चलने वाली गति है |

मानव देह का मूलभूत उद्देश्य इश प्राप्ति है इसके अतिरिक्त और कुछ नहीं | और यह क्रिया से नहीं प्रक्रिया का हिस्सा बन कर ही संभव हो सकेगा | किन्तु आप कोई क्रिया करें ही नहीं ऐसा भी नहीं है | "कर्म हीन नर कछु पावत नाहीं "

मेरा इशारा उस भेद की ओर है जहां इच्छा समर्पण में बदल जाती है | परमात्मा ने इस जीवन को एक प्रक्रिया का हिस्सा बनाया था किन्तु मानव ने सब ध्वस्त कर दिया | बात करते हैं शिशु जन्म की जो की स्वयं में एक प्रक्रिया है किन्तु आज उसका स्वरुप कुछ और ही हो गया है |

प्रकृति ने सब कुछ इंगित करा हुआ है | शिशु को जन्म के बाद ४० दिन एकांत में रखा जाता है | इस समय वह न ठीक से देख सकता है न ही उसको आसपास के शोर का अर्थ समझ आता है और अगले छः माह उसका पाचन तंत्र विकसित होता है जो की गर्भ में पूर्ण विकसित नहीं होता है | दांत आना इसका सन्देश देता है की अब उसका पाचन तंत्र विकसित हो चुका है |
अगर उसके बाद मानव दूध न पिए तो किसी प्रकार की कोई हानि नहीं होती है क्योंकि पोषक तत्व उसको अन्य स्तोत्रों से मिल जाते हैं |
मानव अपनी जन्मदात्री माता के दूध का क़र्ज़ तो याद रखता है किन्तु जिन गायों आदि का दूध उसने ग्रहण करा है उसे भूल जाता है | बाद में उसको पता भी नहीं चलता की उसके जीवन के उतार चढ़ाव क्यों आ रहे हैं और क्या कारण है | अपने इस कर्म के प्रति शायद ही कोई व्यक्ति कभी जागरूक होता है |
बाल्यावस्था की किताबों का बोझ यौनावस्था में भी बना हुआ है और २५-३० साल तक बना रहता है | और इसका नतीजा यह हुआ की जो प्रक्रिया से परे हुआ वह निष्क्रिय हो गया या फिर दुष्क्रियता का शिकार हो गया |
हमाए आसपास हो रहे अपराध और एनी विसंगतियों का कारण ही यही है की हम प्रकृति की प्रक्रिया को भुला चुके हैं |

जब हम इश्वर की पक्रिया को समझने लगते हैं तो हम स्वयं ही बेकार के कर्मों से  मुक्त होने लगते हैं | मानव शरीर एक प्राकृतिक संस्थान है और हमको भौतिकवाद से दूर रखना चाहिए | एक स्वस्थ मन तथा देह के लिए हमको ही स्वयं की प्रकृति को समझ कर उसको इश्वर के अनुरूप ढालना होगा |
जब हम इसको समझे बिना देह को अन्य जगहों पर उलझाने लगते हैं तभी यह मन और शरीर बीमार होने लगते हैं |
वर्षों तक ये आपका प्रतिरोध करते हैं और एक समय बाद हार कर बीमार होने लगते हैं | हमारा शरीर हर तरह की बिमारियों से लड़ने के लिए सक्षम है किन्तु हमारी ही जीवन शैली ने इसको नकारा बना दिया है |
प्रकृति प्रदत्त सुविधाओं की जगह मानव निर्मित वस्तुओं पर हम अधिक आश्रित हो चुके हैं | मानव ने दो चीज़ें बनाइ हैं - चीनी और नमक | दोनों ही देह के लिए ज़हर से कम नहीं हैं | अगर देह को इनकी आवश्यकता होती तो निश्चित ही प्रकृति इनके पौधे भी उगा कर देती |

हम जो भुगत रहे हैं वह और कुछ नहीं बल्कि शरीर और मन के प्रति करी गयी हमारी क्रिया के ही कारण है और कुछ नहीं है | ३५ वर्ष के बाद देह बोलती है की अब बस करो लेकिन मानव नहीं सुनता और परिणाम स्वरुप उसको भुगतान देना होता है कभी इस जगह कभी उस जगह |

रेकी और वैदिक ज्योतिष के द्वारा आप इन सब झाझातों के प्रति स्वयं को जागरूक कर  सकते हैं और अन्य  लोगों के जीवन को भी सुधार सकते हैं | रेकी वैदिक ज्योतिष और प्राकृतिक चिकित्सा विज्ञान ही आज के युग में वो रामबाण हैं जो आपके जीवन जो तार सकते हैं | ज़रुरत है तो बस अपने अंतर की आवाज़ को सुनने की |

अगर आपको लगता है की आपको जीवन की सही राह पर चलना अब शुरू करना ही चहिये तो रेकी और ज्योतिष की सहायता से अपने aura को स्कैन करवाइए |

रेकी सीख कर दूसरों को भी लाभ दीजिये | कर के देखिये और लाभ का वर्णनं आप स्वयं करेंगे |

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Wednesday, 3 January 2018

The immortal eternal City Varanasi

VARANASI: THE CITY OF GODS

It is written in the holy scriptures of Hindus that only who is lucky and blessed will be able to die in Banaras Varanasi . Some call it Kashi, Some call it Varanasi, Some call it Benaras. The fact remains that this is a place where God did lived at a time. If one has that level of presence, he/she can feel it here that this is not a normal place. 

I am a professional Astrologer, Palmist, Numerologist since so many years now and always had the habit of reading the ancient Hindu scriptures as and when I could. I always had this great enthusiasm to visit Banaras and now at the age of 43, I was able to visit there and now sharing my good and bad experiences with you all. 

I boarded 12582 NDLS-MUV train on 30th December 2017 which was supposed to take me there and drop at 11:30 am. I had planned for two full days and on 1st January 2018 I had the return ticket at 22:30 hrs in the same train. Technically I stayed there for a full year.

The wind was no where from Delhi and I was simply happy to see the holy place in the morning. And then I slept thinking about the places I will be going in the morning. Kashi Vishwanath Temple is the most sacred of all the temples there and even our Prime minister Mr Narendra Modi Visited this temple in 2014 for the sake of his victory in the lok sabha polls and he did win.

BANARAS: THE TEMPLE CITY

There is one Kaal Bhairav Temple, Sankat mochan Hanuman Temple, Durga Ji temple and many Maa kaali Temples. 

With so many temples in mind i was asleep and woke up in the morning at around 5:30 am, as per the Indian Railways, by that time I was supposed to reach ahead of Kanpur. To my surprise, there was no kanpur, the train didn`t even reached half the distance it should have. 

I rushed to the door and opened it. There was dense fog outside and wind was spine freezing cold. I was not able to see a meter beyond. And then it struck me that this train is going to get late, very late.

Finally at 11:00 am when I was supposed to be at Banaras, Kanpur came and i took some fruits and lunch at the station. 
Every one in the coach and obviously in the train was troubled due tot his delay, thanks to the weather. 

If you are planning to go in the same weather then take some extra foods with you because you never know when you will reach there.



At 22:29 hrs the train reached Manduadih - The supplementary station to Banaras city. It was 31st December - The new year celebration were on and there was lot of police arrangement in the city. Every where the youth were shouting almost barking in Joy of something which is so stupid- The new year!!!

Hindu new year has nothing to do with 31st of December but running after western traditions has made the youth forget their own golden history and traditions. 


Anyways, I went to Assi ghat, one of the famous ghats or river banks of Banaras. There are three main ghats, The dahwamedh ghat, Assi ghat, Manikarnika ghat and other are there also. 

I immediately realised that one or two days are not enough to feel this city. Banaras is not be lived but to be felt deep inside your soul. 

Gautam Buddha also visited this city and did meditation in Sarnath. There is a very huge temple of Buddhist followers in Sarnath. 

I woke up at around 8:30, a friend of mine who is a grandmaster in Reiki - The healing therapy, called me to find out where i was and i told that I am getting ready now. I took an auto and went to the Kashi Vishwnath Temple of Lord Shiva.


To my surprise, the queue was more than 3 kilometers long, the temples in Banaras close at 12:00  and then re open at 4 pm. My heart felt low as I suddenly knew that I won`t be able to have the darshan this time.

It was a Monday and Monday is the day of Lord Shiva. It was he first day of the new year and so people were very anxious to have the darshan that day and that`s why there was such a long queue.







My Reiki Friend Dr Sudha called me up suddenly asking whether I had the darshan or not and i told her that is it not possible today. She said wait and some one will get to you as there are people who take you to the darshan and charge some money, and even as we were speaking some one touched my shoulder and asked, "Darshan karna hai kya" - "do you want to have darshan" and I said NO!!!

I though he is a cheat and later I realized my mistake. I then kept that person calling in my mind and after few minutes he again came by but this time instead of he looking at me I followed him and ask for the same. he said I came to you but you didn`t listened and I replied leave it. 
He took some money and took me to some place from where it was very easy to have the darshan of the Shiva Linga. 

THE ENERGY POINT: KASHI VISHWANATH TEMPLE

As I was getting close the Shiva Linga, chants of "har har mahadev", "jai jai shiv shamabhu" were going high and strong and I was immersed in the chants and the energy of the temple beyond my neck. With tears of love and devotion in my eyes , I had the darshan of the Shiva Linga and to my surprise I was not able to see it for even a second as due to heavy crowd, the police were literally pushing away the men and the women very badly. I went ahead and came for the second time and had the darshan twice. 

THE BANARSI BREAKFAST 

I was hungry and had nothing since last night. It was almost 11:30 and I went to see the Kaal Bhairav Temple. The queue was very long there also and I dropped the idea because of the hunger i was having. Below is the traditional Breakfast of Banaras:



Khasta kachori


Jalebi, Poori Sabzji, Yellow Rasgulla 

After having this, and this is so pocket friendly Just for INR30/- and no G.S.T and no Pakka Bill, I marched forward with some energy in me and then I reached a thela wala, street hawker who was selling street food called chat:







and he prepared these delicacies in a different way and I recorded it for you:


Then I moved ahead and saw a man selling something yellow something sweet and people waiting for it be served. I asked , what`s this and he said it is "Makkhanmalliyye": This is something very fluffy but tasty and if you go there do have it.



















After filling up my large belly, I remembered what my friend told me, that there is a bank where dead bodies are burnt 24 hours. It is the manikarnika ghat on the banks of river ganges. Hindus burn the bodies of their dead and do not keep them underground, this is the best way to unburden the Mother Earth. 

I went to the bank asking here and there and taking the rickshaw. There ae so many lanes and then by lanes and then further by lanes that one may easily get lost. There is one more delicacy which the westerners keep looking for and it is the Blue Lassi. It is mixed with bhang: A mild marijuana.


BANARAS: DIE HERE AND BE FREE FOR EVER

The view at the ghat was an eye opener and food for thought for one and all. We all have to die one day and what we do is instead of doing good deeds we keep running from pillar to post to fulfill our selfish deeds and make more and more money by this or that way.

















This is the place where the celebration of death continues round the clock. It never stops. In just one day I saw so many dead bodies fumed here, I didn`t saw in my entire life.

Hindi


English

This is the flame which is burning since past 4500 years and may be beyond. Each and every dead body is burnt after taking fire from this flame in the holy land of BANARAS.

After my visit here and pondering on many questions about life, death and spirituality I thought to visit other temples but time was getting out and the real fun was still about to happen. My train was destined to start at 22:30 hrs from Manduadih. 

SARNATH: BEAUTIFUL BUDDHA WAITING FOR US

I went to a book shop and bought a book on palmistry, and then I went to Sarnath where Buddha meditated. There are temples of Bhagwaan Mahavir and Buddha there, Of course separately.

I booked an auto for to and fro and started my journey there, it was just 10 kms from Banaras town. I was supposed to reach in few minutes but it took me 1 hour because of the crowd there was traffic jam everywhere. 

Finally I reached the Buddha temple and went inside. Suddenly a call came from a very dear friend of mine who is into meditation very intensely. I was amazed, is Buddha trying to tell me something or what, and this co incidence keeps happening every now and then between us. The fun part is that my friend thought I am in a Durga ji Temple and as it is said -- All the energies are same name it anything. They cannot be created or destroyed just like matter. They exist since the beginning of the beginning. 












The sarnath Buddha Temple area. That day it was hugely crowded and it was almost impossible to sit there and meditate for a second also.

THE FUN BEGINS:

As I was returning, i got the sms from Indian Railways that my train is delayed and will start at 4:00 in the morning. This was another headache as I had not booked the lodge for two nights, but i requested the owner and he said you can stay for a while and leave in the night as there will be no autos etc in the night to drop you. 

I went to the station and got another sms that train is further delayed to  5:00 amd and then I got another one that finally the train will begin at 7:00.











The train came at 7:30 and started at 8:00 am on 2nd of January.

It was supposed to reach in the evening at New Delhi but it reached at 7:00 am next day in the morning.

That was 

BANARAS IN A DAY

What to do there: Must stay for 4 days atleast and avoid summers. 

When to go: Rains and winters will be good but in winters be ready for a shock. be it rail or flight. Mother nature will listen to no one. 

Extra Precautions:

Keep extra power banks.

Keep extra food if in train. You never know when you will reach if in winters.

Do not stay on the banks but stay at a mid point from where you can access all the three main banks. Transportation is a big issue in winters and I do not know about other seasons.

Enjoy your journey!!!!


If you want to learn Reiki or get your chart scanned by Reiki and vedic Astrology call +919650008266 Dr. Sudha.