Sunday, 23 June 2019

कैंचीधाम नीम करोली बाबा के स्थान में फ़ैल रही राजनितिक गन्दगी


जब हम पिछले वर्ष बाबाजी के स्थान पर गए थे तो वहाँ पर किसी भी व्यक्ति आदि का कोई पोस्टर बैनर नहीं लगा हुआ था | कोई दुकानदार , व्यापारी आदि बाबाजी के नाम से अपना कार्य प्रारंभ करते हैं तो अच्छी ही बात होती है क्योंकि यह उनका अपना विश्वास है | विश्वास से दुनिया कायम है |

लेकिन धीरे धीरे यह देखने में आने लगा की भारतीय जनता पार्टी के छोटे मोटे टटपुन्जिये छाप नेता अपनी शकल दिखवाने के लिए और लोगों पर ज़बरदस्ती अपने छवि बनाने के लिए अपने बैनर कट आउट पोस्टर आदि चिपकवाने लगे हैं और इस बार तो हद ही हो गयी | वहाँ इतने सारे राजनितिक लोगों के पोस्टर देखने को मिले और अधिकतर या कह लीजिये सभी भारतीय जनता पार्टी के नेता लोगों के ही थे |

अपने छुद्र अहंकार के प्रदर्शन के लिए यह दल वैसे भी सालों से जाना जाता है और इनके किसी पार्षद के भी जन्मदिन आदि के होने पर इनके चमचे बड़े बड़े पोस्टर लगवा देते हैं और अपनी मानसिक जाहिलता का परिचय देते हैं |

सिर्फ एक मोदी के नाम पर ही कितने फाल्रू लोग जिनको अपनी गले के कुत्तों का भी वोट नहीं मिल सकता वो सांसद बन गए और जब भिखारी के पास दौलत बरसती है तो वो पागल जैसी हरकत ही करने लगता है यही हाल इन नीच अभिमानी लोगों का हो रहा है |

मुझे निजी रूप से कोई दिक्कत नहीं है ये चाहें जहाँ अपनी बेहूदा शकल और अकल की नुमाइश करते रहे लेकिन जब पवित्र स्थलों पर इन जैसे सत्ता के मल मूत्र चाटने वाले लोगों को देखता हूँ तो मुझे बहुत कोफ़्त होती है और क्रोध भी आता है और मन में भरे बहुत सरे अपशब्द भी इनको बोलने का मन होता है लेकिन मन मसोस के रह जाता हूँ |

ये घटिया नस्ल के राजनीतिग्य या उनके चमचे या संतानें हैं जो धर्म इश्वर को अपने बाप का माल समझ कर बैठ गए हैं | और यह बात इस दल के लिए आने वाले समय में बहुत बुरी होने वाली है | धर्म अध्यात्म इश्वर को अपनी बपौती ही यह भारतीय जनता पार्टी के नेता सांसद विधायक समझ कर बैठ गए हैं | 

आज मोदी अगर किसी कारणवश अपने पद और राजनीती से हट जाते हैं अथवा काल के ग्रास बन जाते हैं तो इनमें से ९० प्रतिशत लोगों को गली का कुत्ता भी पूछने वाला नहीं है यह सर्वमान्य तथ्य  है | चाहे तो वे किसी और दल से चुनाव लड़ कर देख सकते हैं |

 फिर अपने पद अथवा बाप के पैसे का इतना भद्दा भोंडा प्रदर्शन किस लिए ? क्या ये लोग यह खुशफ़हमी पाल कर बैठे हुए हैं कि  इनके करण ही इनका अस्तित्व है ? ये लोग ठीक उस कुत्ते की तरह हैं जो बैलगाड़ी के नीचे चलता है तो सोचता है की बैलगाड़ी उसके करण ही चल रही है | इस से ज्यादा कुछ नहीं |

और जहाँ तक समझ आता ये ये श्वान सुधरेंगे नहीं अपनी नीचता का प्रदर्शन करते ही रहेंगे | जैसे लगभग एनी धर्म स्थलों पर इनकी फोटू किसी घटिया मुद्रा में देखने को मिल जाती है वैसी ही स्थिति अप मेरे बाबाजी के स्थल की भी होने लगी है और यह देख कर मेरेको बहुत दुःख है और मन में क्षोभ है |

जो भी वहाँ के लोकल लोग इस ब्लॉग को पड़ें तो अवश्य वहां के नेता लोगों से अनुरोध करें की अपनी गन्दगी अपने पास ही रखिये बाबाजी के पास से दूर करिए |






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