Sunday, 14 January 2018

hon sha ze sho nen होन शा ज़े शो नेन से नसों का इलाज

hon sha ze sho nen  होन शा ज़े शो नेन

लगभग पांच छह साल पहले एक दिन पता चला की तरुण जो कि मेरा रिश्तेदार है , उसका एक्सीडेंट हो गया | वो जिस बस से उतर रहा था उसी का टायर उसके पैर के पंजों पर चढ़ गया था | दो दिन बाद मैं अस्पताल गई तो मुझे पता चला की उसके अंगूठे और २ उंगलिया पूरी तरह खराब हो चुकी हैं  जिस से वहां का ब्लड सर्कुलेशन रुक चुका  था और पैर धीरे धीरे काला पड़ने लगा था | 

डॉक्टर का कहना था की कोशिश चल रही है और दो दिन में पता चलेगा की पैर का क्या काना है , हो सकता है की पैर काटना पड़े| 

तरुण मात्र २४ वर्ष का था और वो रेकी के बारे में कुछ जानता भी नहीं था | मैंने उसको थोडा सा समझाया और कहा की अगर तुम इश्वर पर विश्वास करते हो तो जो रेकी मैं करने वाली हूँ उसको पॉजिटिव तरीके से ग्रहण करे | हो सकता है की हमारी कोशिश कामयाब हो जाए | 

दो दिन बहुत कम समय होता है और रेकी में अधिक समय लगता है फिर भी मैंने हिम्मत नहीं हारी | और कोई दूसरा रास्ता भी नहीं था| 

उसी रात मैंने उसकी साइकिक सर्जरी करी और मेरा काम था ख़राब नसों को हटाकर नई नसों को लगाना | ये आपको अजीब लग सकता है पर रेकी ऐसे ही काम अक्रती है | 

मैंने हीलिंग के दौरान नसें हटाई और नई नसें लगाईं और जब नसों को जोड़ने का समय आया तो मैं सोच में पड़  गई  की इनको कहाँ कैसे जोड़ना है |  मैं डॉक्टर नहीं हूँ जिसको मानव शरीर की बारीकियों का पता हो | 

एक बार मन विचलित हुआ किन्तु रेकी की डिवाइन गाइडेंस के चलते उसी क्षण मुझे याद आया की hon sha ze sho nen  होन शा ज़े शो नेन, जो की रेकी में कनेक्टिंग सिम्बल है जो दूरस्थ इलाज में हमारा संपर्क स्थापित करते हैं  और अगर येही उनका काम है तो क्यों अ ये काम उन्हीं पर छोड़ दिया जाए | 

मैंने तुरंत "होन शा" को वहां स्थापित करा और ये अफार्मैशन डाली  की इनको इनके सही स्थान पर जोड़ दीजिये | 
सर्जरी पूरी होने के बाद मैंने रेकी के इस नए मार्गदर्शन के लिए उसका धन्यवाद करा और साइकिक सर्जरी में "होन शा" के एक नये  इस्तेमाल का आविष्कार किया | 

तब से आजतक जब भी बॉडी ऑर्गन या ग्लैंड ट्रांसप्लांट करना होता है तो hon sha ze sho nen  होन शा ज़े शो नेन का मैं प्रयोग करती ही हूँ | 

मेरे द्वारा सिखाये हुए सभी छात्र जिनको रेकी में चैनल कहा जाता है इसी विधि का प्रयोग भी करते हैं और अच्छा परिणाम भी पाते हैं | 

जब आप किसी नेक कार्य की शुरुआत करते हैं तो उसका परिणाम स्वयं इश्वर अपने हाथ में ले लेते हैं | 

दो दिन बाद जब तरुण का चेकअप हुआ तो उसकी नसें काम अकरने लगीं थीं और नसों में रक्त का प्रवाह सही होने लगा था| कुछ ही दिनों में वो अस्पताल से घर आया और आज तक उसका पैर एकदम ठीक है | 

Dr. Sudha 9650008266