Sunday, 14 January 2018

नवजात शिशु की रेकी हीलिंग प्राकृतिक ऊर्जा के द्वारा

Reiki Symbol for Curing New Born Babies

रेकी ग्रांडमास्टर REIKI GRANDMASTER बनने के बाद, जो कि रेकी सीखने का अंतिम पड़ाव होता है, मैंने रेकी हीलिंग में नित नए प्रयोग करे और ये सब डिवाइन गाइडेंस divine guidance के चलते ही हो रहा था | परमात्मा की करनी सिर्फ वही जनता है | मेरा सोचना, मेरा करना सब किसी और के ही हाथों हो रहा था | बीमारी से पहले ही उसके इलाज का तरीका तैयार हो रहा था, मुसीबत आने के पहले ही उसका समाधान मेरे पास आ जाता था |

इश्वर के इस मनोरंजक खेल को में साक्षी भाव से देखकर रोमांचित होती थी और जीवन में एक अद्भुत आनद समाविष्ट हो चुका था | कर्ता , कर्म और करण का भेद अब समझ आ रहा था | मुझे पता था और है की मैं सिर्फ एक जरिया मात्र हूँ और करने वाला मुझे सिर्फ किसी के भले के लिए प्रयोग में ले रहा है | इसे भी मैं उस परम पिता का आशीर्वाद ही मान कर अपना काम करती रही हूँ |

बात उस समय की है जब मैं अपने डे केयर में आखिरी तीन बच्चों के साथ बैठी हुई थी और मेड जा चुकी थी | अचानक ही बहुत तेज़ बारिश शुरू हो गयी और बिजली कौंधने लगी | मैंने उन बच्चों को अपने पास बिठा लिया जिससे की उनको डर न लगे | मुझे बिजली के कड़कने से यह आभास होने लगा की वो मुझसे कुछ कहना चाह रही है | इस प्रकार से जब भी रेकी मुझे इशारा करती है तो मेरा आज्ञा चक्र मुझे उसका आभास कराने लगता है |

उस समय भी मुझे वही आभास होने लगा और मैंने देखा कि बच्चे अपना खेलने में मस्त थे, मैं अपने डे केयर के दरवाज़े पर गयी और समझने का प्रयास करने लगी | उस समय अंतर्ध्यान होना संभव था किन्तु जो समय जिस कार्य के लिए होता है उसे कोई बदल नहीं सकता | 

वो क्या होता है कैसे होता है उसे समझा पाना, शब्दों में बाँध देना संभव नहीं होता है | 

उस समय मेरे पास कुछ बच्चे ऐसे भी आते थे जो की मानसिक रूप से स्वस्थ नहीं थे , पूछने पर पता चला था की जन्म के समय वो रोये नहीं थे | मेरा मन उनके लिये व्यथित होता था और मैं सोचती थी की रेकी से इनकी कैसे मदद कर सकती हूँ | और ये वही समय था जब ब्रह्माण्ड ने मेरे इस प्रश्न का उत्तर मुझे दिया | 

बिजली की उस ऊर्जा को मैंने अपने हाथों में प्राप्त करा और एक सिम्बल का रूप दिया जिसको मैं उन बच्चों पर प्रयोग करने वाली थी जिनको ऐसी समस्या थी | उनकी कमी को रेकी पूरा करेगी ऐसा मुझे पूर्ण विश्वास था | 

मुझे पता नहीं चला की समय कितना लगा उसको सिम्बल का रूप देने में , मात्र एक क्षण या कुछ मिनिट पर मेरी रचना पूर्ण हो चुकी थी |  सिम्बल का नाम, रंग  और काम संकल्प के साथ  पूरा हो चुका था | 
हमेशा की तरह मैंने रेकी और इश्वर को धन्यवाद दिया | रात्री में ध्यान के समय बाकी का बचा हुआ कार्य मैंने पूर्ण कर लिया |

दो महीने बाद मेरी भाभी की डिलेवरी थी | मैं और मेरा भाई उसे लेकर अस्पताल पहुंचे और सारी रात इंतज़ार करते रहे लेकिन डिलेवरी नहीं हुई | अगले दिन मेरी दूसरी बहनें आ गयीं और हम आराम करने के लिए जाने लगे |  थोड़ी देर में हमारी बहिन का फोन आया कि डिलेवरी हो गयी है लेकिन डॉक्टर ने बताया नहीं है की बीटा हुआ है की बेटी |

अस्पताल जाकर पता चला की बच्चा अभी रोया नहीं है और अभी ऑब्जरवेशन में है | यह सुनकर मैं वहाँ से हट कर एकांत में आ गयी और अपने आंसुओं से अपने इश्वर और गुरु को धन्यवाद दिया की कैसे उन्होंने समस्या आने से पहले ही मेरे हाथों में यह शक्ति दे दी थी |

मैंने रेकी का आह्वाहन करा और अपने नवजात भतीजे के साथ कनेक्शन बनाया | उस दिन मैंने जो सिम्बल बनाया था उसका प्रयोग करा और हीलिंग देना शुरू करी |

आधे घंटे बाद नर्स ने बताया कि बच्चा ठीक है और बेटा हुआ है | सभी परीक्षण करके डॉक्टर ने बच्चा हमारे हाथ में दे दिया |

इस तरह उस सिम्बल का सबसे पहला प्रयोग मेरे ही घर में हुआ | मैं इश्वर की ये लीला चुपचाप देखती रही और ह्रदय से धन्यवाद देती रही यह जानते हुए भी की मैं उनका धन्यवाद करने के लायक भी नहीं हूँ | 

इसके बाद हरिद्वार में माँ गंगा की शीतल ऊर्जा से जले हुए लोगों की हीलिंग के लिए सिम्बल बनाया और लोगों का उफ्चार करा |

चंद्रमा की शीतल ऊर्जा से अवसाद से घिरे लोगों और मानसिक तनाव को कम करने के लिए भी सिम्बल बनाया और इनके अनुभव मैं अपने अगले लेख में करुँगी | 


Dr. Sudha: 9650008266