Sunday, 21 January 2018

सपनों का महत्त्व और वास्तविकता

       सपने क्यों आते हैं और क्या दर्शाते हैं 

नींद में बंद आँखों से देखी जाने वाली कोई घटना , व्यक्ति अथवा वाक्या, कुछ हो चुका या होने वाला, कुछ जाना कुछ अंजाना सपने हैं | हम जब नींद के आगोश में रहते हैं तो एक अलग ही दुनिया में पहुँच जाते हैं | उठने के बाद कुछ याद रह जाता है और कुछ हम भूल जाते हैं | कुछ लोग सपनों को जोड़ तोड़ कर अपने निकट भविष्य का निर्धारण भी कर लेते हैं और कुछ इसे शकुन अपशकुन से भी जोड़ लेते हैं | 


क्या असल में इन सपनों का हमारे जीवन में कोई महत्त्व होता है ? क्या ये मात्र परिकल्पना मात्र हैं ? 

हमारे दिमाग का चलना  कुछ तरंगों पर निर्भर करता है | BETA, ALPHA, THETA AND DELTA वो तरंगें हैं जो हमारी चेतना और अवचेतना का निर्धारण करती हैं | जब हम पूरे होश में रहते हैं तो वो बीटा स्तर है और जब हम ध्यान में, सोने से ठीक पहले , सोकर उठने के ठीक बाद जिस स्तर हम रहते हैं वह अल्फ़ा स्तर है | थीटा में चेनता सिर्फ नाम मात्र की होती है लेकिन इसमें भी कुछ लोग बहुत अच्छी हीलिंग कर लेते हैं और ध्यान के बहुत अच्छे स्तर तक पहुँच जाते हैं | 

आखिरी स्तर है डेल्टा जिसे डीप स्लीप भी कहा जाता है | इसमें मनुष्य का चेनता में रहना असंभव होता है | 

जैसे हमारे दिमाग और नींद के चार स्तर होते हैं उसी प्रकार हमारे सपनों के भी प्रकार होते हैं जो दिमाग की इन्हीं तरंगों और स्तरों पर निर्भर करता है|

बीटा : यह चेतन अवस्था है , जब हम सोने लगते हैं और नींद कच्ची ही होती है, हमें इसी अवस्था में सपने भी दिखाई दे जाते हैं, बीटा में हम चीज़ें देखते हैं जिसे हम इस जीवन में जी रहे हैं और जो प्रतिदिन हमारे साथ घट रहा होता है जैसे हम सुखद परिवार या पडोसी या काम काज से जुड़े हुए लोग या कोई घटना मतलब रोज़मर्रा का जीवन बीटा में देखते हैं | 

अल्फ़ा: जब मस्तिष्क की आवृत्ति थोड़ी कम होती है तब हम अल्फ़ा स्तर में जाते हैं | इस अवस्था में आये हुए सपनें हमारी अन्दर दबी हुई चाहतें होती हैं | जो हम बनना चाहते हैं , करना चाहते हैं , कुछ पाना चाहते हैं , या फिर हम खुद को असलियत में जहां देखना चाहते हैं वही सब हम अल्फ़ा स्तर में देखते हैं | कई बार हम अपने पसंदीदा अभिनेता या नेत्री के साथ प्यार कर रहे होते हैं आदि इसी प्रकार के सभी स्वप्न अल्फ़ा स्तर में आते हैं | 

थीटा : जब हम इस स्तर में होते हैं तब हम अपने अवचेतन मस्तिष्क के ठीक मध्य में होते हैं और चेतन मस्तिष्क पूर्ण रूप से  कार्य बंद कर  चुका होता है |  यहाँ भूत भविष्य वर्तमान का भेद समाप्त हो चुका  होता है | हमारे इर्द गिर्द घूम रही लाइफ साइकिल में से कुछ भी या कोई भी द्रश्य हम देख पाते हैं, यदि वो वर्तमान का है तो हम उसे पहचान पाते हैं यदि वह भूत या भविष्य में से कहीं का होता है तो हमारे लिए वह द्रश्य अंजाना सा होता है लेकिन वो होता हमारे ही जीवन का हिस्सा है | कभी हम खुद को अनजान लोगों के बीच पाते हैं और कभी किसी पहाड़ या किसी पानी के आस पास देखते हैं | 

कभी हम आग देखते हैं कभी हम सांप देखते हैं या किसी की शादी या मृत्यु लेकिन उसका वर्तमान से कोई लेना देना नहीं होता | 

कभी कभी लोग एक ही सपने को बार बार देखते हैं या मरे हुए अपने लोग आकर कोई सन्देश देकर जाते हैं और यह सब थीटा स्तर में ही संभव होता है| 

हमारे अवचेतन में समस्त ब्रह्माण्ड बसा हुआ है | ऐसा कुछ नहीं है जो की नहीं है, या तो वो घट चुका होता है या घटने वाला होता है | थीटा में हम कुछ भी देख सकते हैं लेकिन उसको किसी से जोड़ना ठीक नहीं है  क्योंकि वो हमारे ही जीवन का एक अंश है | 

डेल्टा : यह चिर निद्रा की अवस्था है और यहाँ भी हम अपने अवचेतन की सैर ही करते हैं सब देखते हैं लेकिन हमें बाद में याद कुछ नहीं रहता है | डेल्टा वह अवस्था है जहां हम चेतनाहीन हो जाते हैं और हम वही याद रख पाते हैं जो हमारी चेतना में होता है |


Dr. Sudha: +919650008266