Saturday, 8 June 2019

Babaji Saves again: Miracles of Neem Karoli Babaji




It was 11th of May 2019, My train was scheduled from New Delhi to some place and from there I had to go to Amarkantak in search of Neem Karoli Babaji. It was a hot day and I was really not feeling good that day and there was something wrong in the day which I was not able to catch up with. A pigeon in a very bad shape came into the lawn and I saw it and thought he is going to die. 

Anyways, I got afraid because such a thing has never happened. I was now getting other thoughts like not going to the destination and the train was at 9 pm. Making a hard stand, I went to the station and slept well. I told to my friend also that this thing has happened and the reply was don`t worry Babaji will take care.

I also said in my heart that it is you who has to take care because my heart was really pounding with fear and anxiety. 

Morning came and I reached the destination. I got a call from the maid who cooks for all of us, she asked, "did you forgot to lock the door", and I was like NO I said why would I and How can I , what happened, she said the door is open, I said to go inside and see what happened, she went inside and saw that the clothes were all over the place and I told her to do a wattsapp video but she could not connect and told me that everything is just here and there. She then collected everything from everywhere and kept back.

My heart was getting out of control and I asked did you see a small packet in the locker of almirah and she replied nothing is there, but then she said that there is something on the floor. So that was some kind of solace for me. But my mind was stuck. That was my portable hard disk which had a lot of files and other important and crucial data. So that is why I was worried. 

Days passed away and I spent my time in Amarkantak and almost forgot everything till the time I reached home. So many things happened and I have shared them all with you. The moment I entered I ran to the almirah and found it. 

I cannot tell you how relieved I was because it contained something of the utmost value for me. There was no cash as I am not Ambani Tata etc so there is never cash at the place I sleep and eat. The only thing I could do is thank Babaji and Siddhi Maa for protecting that valuable. 

That pigeon did die the next day or in the night I cannot say but she told me in the morning that he is no more.







When Babaji is with us there is no need to worry about anything, is what I have gathered in this small time. He is in my heart, soul breath everywhere just like....
श्रीराम जय राम जय जय राम श्रीराम जय राम जय जय रामश्रीराम जय राम जय जय रामश्रीराम जय राम जय जय रामश्रीराम जय राम जय जय रामश्रीराम जय राम जय जय रामश्रीराम जय राम जय जय रामश्रीराम जय राम जय जय रामश्रीराम जय राम जय जय रामश्रीराम जय राम जय जय रामश्रीराम जय राम जय जय रामश्रीराम जय राम जय जय रामश्रीराम जय राम जय जय रामश्रीराम जय राम जय जय रामश्रीराम जय राम जय जय रामश्रीराम जय राम जय जय रामश्रीराम जय राम जय जय रामश्रीराम जय राम जय जय रामश्रीराम जय राम जय जय रामश्रीराम जय राम जय जय रामश्रीराम जय राम जय जय रामश्रीराम जय राम जय जय रामश्रीराम जय राम जय जय रामश्रीराम जय राम जय जय रामश्रीराम जय राम जय जय रामश्रीराम जय राम जय जय रामश्रीराम जय राम जय जय रामश्रीराम जय राम जय जय रामश्रीराम जय राम जय जय रामश्रीराम जय राम जय जय रामश्रीराम जय राम जय जय रामश्रीराम जय राम जय जय रामश्रीराम जय राम जय जय रामश्रीराम जय राम जय जय रामश्रीराम जय राम जय जय रामश्रीराम जय राम जय जय रामश्रीराम जय राम जय जय रामश्रीराम जय राम जय जय राम















Tuesday, 4 June 2019

The miracle continues: नीम करोली बाबा की एक और कृपा

जैसा कि मैं अपने हर बाबाजी के लेख में कहता हूँ की सिर्फ सत्य ही लिखूंगा और जो निजी है उसका वर्णन नहीं करूँगा इसमें भी पाठक सिर्फ सत्य की ही आशा करें किसी आडम्बर आदि की नहीं | Only the truth will be written here and some very personal details will be omitted.

हमेशा की तरह मेरे अभिन्न मित्र श्री अरुण शर्मा जी से एक दिन बात चल रही थी और उन्होंने अचानक ही कह दिया की अमरकंटक हो आइये | बाबाजी ने देह त्याग से पूर्व कहा था की वे अमरकंटक में जाकर रहेंगे पागल का भेस बनायेंगे और लोगों को डूंग (पत्थर ) से मारा करेंगे | बहुत दिनों से मैं जाना चाह रहा था और मुझे कहीं जाना था जहाँ से आगे अमरकंटक भी आता है | सब गूगल पे सर्च करा और एक होटल बुक करी और वापसी का टिकेट कन्फर्म नहीं था वेटिंग था | शर्मा जी क्योंकि पत्थर खिलवाने भेज रहे थे तो मैंने कहा की आप ही कन्फर्म करा के दो और हमेशा की तरह उन्होंने कह दिया की मैं सिर्फ प्रयास करूँगा होना न होना बाबाजी मी मर्ज़ी | मैंने कहा ठीक है आप प्रयास कर लेना = ये हर बार का ही रहता है |

बाकी का कथानक मेरे पिच्च्ले ब्लॉग में हैं | मैं अपने बाल्यकाल के मित्र सिद्धार्थ कपूरिया के मित्र संजय पयासी जो अपना नाम संजय सैलानी लिखते हैं , उनके साथ पञ्च धरा गया | वहां हमें एक धूर्त बाबा मिले और एक बहुत ही सज्जन बाबा मिले | वो सज्जन बाबा विगत ४० वर्षों से वहीँ पञ्च धरा में रह रहे थे और कुछ ही दिन पूर्व उनके स्थल पे चोरी हो गयी थी और उनका काफी धर्म सम्बन्धी साहित्य चोरी हो गया था | पता नहीं क्यों उनसे बात करके मुझे कोई ख़ास श्रद्धा नहीं उत्पन्न हुई जबकि मेरे मित्र के मित्र और अब मेरे भी मित्र संजय सैलानी के अनुसार लोगों ने उनके पास शेर भालू सब बैठे देखे हैं क्योंकि वो ठेठ जंगल में एक मछरदानी में रह रहे हैं |





सीख "जीवन में आपको जब भी ऐसे संत लोग मिलें तो यथा शक्ति उनको धन दीजिये क्योंकि वो कोई अरबपति राहुल गाँधी अमिताभ बच्चन  मुकेश अम्बानी नरेन्द्र मोदी अमित शाह नीरव मोदी सोनिया गाँधी नहीं बनना चाहते हैं वे सिर्फ जीवन यापन करना चाहते हैं जिस से की उनके और इश्वर के बीच में कोई नहीं आये , ये संत , संत ज्ञानेश्वर के भक्त हैं और इनके पास सिर्फ एक ही पुस्तक है "ज्ञानेश्वरी" जिसका ये सतत अध्ययन करते रहते हैं इस वन में , इनके चरणों को देखेंगे तो एक निशाँ पायेंगे जहाँ किसी जेह्रीले जंतु ने काट लिया था और ये कोमा में चले गए थे " माँ नर्मदा ने ही इनके प्राणों की रक्षा करी | ३०० से अधिक भाषाएँ इनको इस वन में बैठे बैठे ज्ञात हुई हैं जिसका विडियो आप हमारे चैनल पर देख सकते हैं "

आते समय मैं उनको कोई दक्षिणा नहीं देकर आया | और जब हम आधे रस्ते आ गए तो मुझे मन में ग्लानी होना शुरू हुई | मैं बाबाजी से प्रार्थना करने लगा की की महाराज गलती हो गयी | और मन बहुत व्यथित हो उठा | उस भाव को मैं समझा नहीं सकता | मैं लगातार महाराज जी से प्रार्थना करता रहा की प्रभु कोई बड़ी सजा मत देना | गलती करवाने वाले भी आप ही हैं | मुझे लगातार योगी कथामृत का वो संस्मरण मन में आने लगा जहाँ वो जाते हैं एक मंदिर के सामने और शीश नहीं नवाते हैं | जिन गुरु के पास उनको जाना होता है वो वहां बहुत देर बाद बहुत मुश्किल से पहुँच पाते हैं और जब वो गुरु जी उनको मिलते है तो पहला प्रश्न वो यही करते हैं की मंदिर के सामने तुमने नमन क्यों नहीं करा | होता यह है की परमहंस जी जी जब उस मंदिर पे जाते हैं तो पता नहीं क्यों उनका मन नहीं करता और वे बिना नमन करे बढ़ जाते हैं | ऐसा कुछ वृत्तान्त था | और मेरे मन में लगातार वही सब घूम रहा था और अन्धेरा घुप्प हो चूका था | वहां कोई एक आकृति के छलांग लगाने की आवाज़ आई और सैलानी महोदय ने कहा ये बाज़ है किन्तु बाद में वो बोले की कुछ और है | कुछ मिनिट बाद फिर से वही आवाज़ आई और इस समय उन्होंने कहाँ की लाइट बंद का दीजिये | हम अपने अपने मोबाइल की लाइट से ही आगे बढ़ रहे थे | खैर उस समय कुछ नहीं हुआ | जब हम होटल पहुंचे तो उन्होंने बताया की वो कोई प्रेतनी , निशाचर , आदि थी जिनका की उल्ल्लेख देवी जी के स्त्रोतों में आता हैं | मैंने हंस के टाल दिया पर उनके अनुभव के आगे मुझे मानना पड़ा की कुछ मनुष्य से हट कर था | जो चीता या बाज़ नहीं था |

घने जंगलों में भूत प्रेत पिशाच आदि सामान्य होते हैं | आपको ऐसा लगता है की मैं ठिठोली कर रहा हूँ तो आप स्वयं जाइए अनुभव कीजिये | और वैसे भे मैं झूट नहीं बोलता जहाँ तक संभव होता है |

अगले दिन मेरी यात्रा थी वापसी की और जैसा की मैंने टिकेट बताया था की कन्फर्म नहीं था , सब शर्मा जी के भरोसे था | और उन्होंने महाराज जी के भरोसे कर के रखा हुआ था | यहाँ और लम्बा कर सकता हूँ लेकिन अभी थोड़े कम में बताता हूँ | मैं स्टेशन पहुंचा , टिकेट कन्फर्म नहीं था , और ट्रेन में कोई जगह नहीं थी भीषण गर्मी थी | मैं ट्रेन के आने के पहले उसके प्लेटफार्म पर जाकर बैठ गया और महाराज जी से अनुनय विनय करने लगा की की इतनी सजा मत दो महाराज बैंड बज जाएगा कुछ करो |

में बैठे बैठे बाबाजी से आग्रह ही कर रहा था की एक विदेशी व्यक्ति मेरे सामने से निकला और मुझे देख कर उसने कहाँ और भइय्या कैसे हैं , मैंने भी कहा बढ़िया और हमारी कुछ बातचीत हुई | वो उसी ट्रेन से दिल्ली आ रहे थे | मैंने उनसे कहा की मेरा टिकेट कन्फर्म नहीं है और आप टिकेट देखने वाले से बोल देंगे तो मैं आपके साथ आपके डब्बे में जा पाऊंगा और मुझे एक बड़ी परेशानी से बचना संभव हो जाएगा | उन्होंने कहा की ठीक है आप आई जाइएगा | और मैं मन ही मन बाबाजी का धन्यवाद करने लगा की प्रभु महाराज तुमसे बड़ा कोई नहीं है | मदद भी भेजी तो किसी विदेशी की !!! रेल आई और हम दोनों उसमें सवार हो गए | टिकेट परिचालक महोदय आये और उनसे मैंने कहा की में अपने मित्र के साथ जा रहा हूँ और आप जो भी किराया बनता है ले लीजिये और इनके साथ बैठने की व्यवस्था मैं स्वयं कर लूँगा | उन्होंने बोला की जगह नहीं है आपको बैठे बैठे जाना पड़ेगा तो मैंने कहा की कोई बात नहीं और बात ख़तम हो गयीं |

सिंगापुर के श्री Go How Tong जिनको बाबाजी ने भेजा | ये वहां पर टूर गाइड हैं | ६५ वर्ष आयु है |

कुछ देर बाद वो सज्जन आये और मुझसे बोले की आगे झाँसी से आपको सोने की भी जगह मिल जायेगी | झाँसी आने पर आप इस बर्थ पर सो जाइएगा | ट्रेन काफी लेट थी और 12 बजे झाँसी आ गया और मैं जाकर आराम से सो गया| सुबह होने पर उन सज्जन को लक्ष्मी नगर जाना था और मैं उनको उनका ऑटो करवा दिया और अपनी मेट्रो से अपने गंतव्य पर चला गया |

महाराज जी ने मुझे पूरे आराम से यात्रा करवाई |

महाराज जी कब कैसे किस पर कृपा कर देते हैं आप कभी नहीं जान सकते |

उस रेल मार्ग में मेरी एक छोटी बहिन रहती हैं जो बहुत ही उत्तम निरामिष भोजन बनाती हैं | मैंने उनसे ही अनुरोध करा की मेरे साथ कोई हैं जिनको घर के ऐसे प्रकार की भोजन की चाह है और उन्होंने पाने पूर्ण ह्रदय से अत्यंत स्वादिष्ट भोजन पका कर दिया और उन सज्जन ने बोला के लगभग २० वर्ष बाद  उन्होंने इतना स्वादिश भोजन ग्रहण करा है | बहिन ने साथ में मेरेको बहुत सारा मिष्ठान भी दिया जिसे वो सज्जन स्वयं ही लेकर चले गए क्योंकि उनको वो बहुत ही स्वादिष्ट लगा |

जय हो महाराज जी | नीम करोली  बाबा जी तुम ही मेरे पालनहार तारणहार मेरे हनुमान मेरे राम | तुम्हारे रहते कभी कोई समस्या नहीं आ सकती इतना मैं जान चुका |

बस एक कामना हमेशा है जो आप जानते हैं और आप तथास्तु बोल चुके हैं | बस आपकी कृपा का इंतज़ार |

अटक जाए कोई काम बस जप ले राम का नाम | श्रीराम जय राम जय जय राम महाराज जी जय हो |

























Thursday, 16 May 2019

माँ नर्मदा के उदगम स्थल अमरकंटक की अविस्मर्णीय यात्रा



                                      अमरकंटक में नीम करोली बाबा की खोज

नमामि देवी नर्मदे महाराज जी जय शिव शम्भू जय जय श्रीराम जय वीर हनुमान

हमेशा की तरह मेरे अभिन्न मित्र अरुण शर्मा जी से मैं कुछ बात कर रहा था और कहीं पर जाने की बात चल रही थी | अचानक उन्होंने बोला की वहाँ तक जा ही रहे हैं तो अमरकंटक भी हो आइये क्योंकि उनसे मैंने बहुत पहले कहा था की मैं अमरकंटक जाना चाहता हूँ क्योंकि मेरे आपके हम सभी के प्रिय मित्र गुरु महाराज जी नीम करोली बाबा ने देह त्याग से पूर्व कहा था की वे अब अमरकंटक जाकर रहेंगे और पागल बन कर रहेंगे और लोगों को डूंग(पत्थर) से मारा करेंगे | शर्मा जी ने कहा की कितना अच्छा हो की आपको भी उनके हाथ का पत्थर खाने को मिल जाए और कुछ ही देर बाद मैंने अमरकंटक का आने जाने का प्रबंध रेल द्वारा कर लिया और उनको सूचित कर दिया क्योंकि पत्थर खिलाने वोही चाह रहे थे तो भेजना भी उन्होंने ही था|



अमरकंटक के प्रमुख दर्शनीय स्थल :

  १.   माँ नर्मदा उद्दगम कुंड 
   







  




  २.   श्री प्राचीन मंदिर
  ३.   माई की बगिया
   
 

 

 




  ४.   सोनमुड़ा सोन नदी का उद्दगम

   
 


 

  
  ५.   श्री यंत्र मंदिर
  ६.   कपिल धारा
  ७.   दूध धारा
    
 

 


 

 

 


  ८.   श्री जैन मंदिर
  ९.   श्री चित्रगुप्त मंदिर  

अमरकंटक का पेयजल प्राकृतिक रूप से मीठा है और इसको पीकर जो तृप्ति आपको मिलती है उसकी कोई और उपमा नहीं है |

कैसे आना चाहिए : अमरकंटक आने के लिए रेल से पेंड्रा रोड नाम के स्टेशन पर आपको उतरना होगा और वहां से आप अपनी जेब के अनुसार अमरकंटक आने का प्रबंध कर सकते हैं | जो शेयर टैक्सी है वह ७० से 100 में पहुंचा देती है और कुल समय करीब डेढ़ घंटा लग सकता है | मार्ग बहुत ही सुन्दर है और कहीं पर भी आपको ऐसा नहीं लगता की मध्य प्रदेश में हैं क्योंकि उतनी भीषण गर्मी नहीं लगती और आते आते वह भी कम होने लगती है |पेंड्रा रोड छत्तीसगढ़ में आता है और अमरकंटक मध्यप्रदेश में | अगर स्वयं का वाहन है तो बहुत ही अच्छी बात है| हवाई यात्रा के लिए मेरे अनुसार जबलपुर ही उतरना होता होगा वैसे मुझे ठीक से पता नहीं है और पता करने की इच्छा भी नहीं है |

कहाँ रुकना चाहिए : अमरकंटक में बहुत सारे होटल आदि हैं जहाँ आप रुक सकते हैं किन्तु आपको मुख्य मंदिर तक आना चाहिए और यहीं के किसी होटल में रुकने का प्रबंध करना चाहिए | मंदिर में भी कमरे दो सौ रूपये प्रतिदिन के हिसाब से उपलब्ध हैं और अगर आप परिक्रमा वासी है तो भी आपके लिए यहाँ बहुत सारी रुकने की व्यवस्थाएं हैं , कई आश्रम हैं , लॉज हैं , अतः रुकने का ऐसा कोई ख़ास सरदर्द नहीं है |

कब आना चाहिए : मैं यहाँ मई की भीषण गर्मी में आया हूँ और कह सकता हूँ की साल भार आप कभी भी अमरकंटक आ सकते हैं | सीजन वैसे सर्दियों में ही होता होगा लेकिन गर्मियों में भी कोई ख़ास गर्मी का अनुभव मुझे नहीं हुआ | जिसके पास माया कम होती है उसको वैसे भी गर्मी कम लगती है |

खाना पीना : अमरकंटक में किसी प्रकार का मांसाहार , मदिरा आदि का कोई प्रबंध नहीं है और अगर आप इन सबके इच्छुक हैं तो २५-३० किलोमीटर पहले आपको रुकना चाहिए क्योंकि उसके बाद ऐसी सब व्यवस्था बंद हो जाती है | यहाँ शुद्ध भोजन शाकाहारी भोजन मिलता है और बहुत स्वादिष्ट होता है| आप दाल रोटी खाकर भी आनंदित विभोर हो सकते हैं |

महाराज जी अभी तक तो नहीं मिले हैं पर खोज जारी है और पता है की जब उनकी इच्छा होगी तभी होना है अभी तो सिर्फ हाथ पैर पटकना ही है और कुछ नहीं |

श्रीराम जय राम जय जय राम श्रीराम जय राम जय जय राम श्रीराम जय राम जय जय राम नमामि देवी नर्मदे जय शिव जय शिव जय शिव